सितारामपुर, पश्चिम बंगाल । रविवार को ईसीएल ने विश्व के सबसे सफल कोयला खदान बचाव अभियान की 36वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में माइन रेस्क्यू डे मनाया। इस अवसर पर 1989 में रणिगंज स्थित महावीर कोलियरी में 65 खनिकों को बचाने वाली ऐतिहासिक बचाव प्रक्रिया के सूत्रधार, ईसीएल के तत्कालीन महाप्रबंधक (रेस्क्यू सर्विसेज) डॉ. जसवंत सिंह गिल (1939–2019) को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके अभिनव उपकरण प्रसिद्ध “कैप्सूल गिल” ने इस अभियान को वैश्विक इतिहास में अमर कर दिया। कार्यक्रम में सतीश झा, अध्यक्ष–सह–प्रबंध निदेशक, ईसीएल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने डॉ. गिल की प्रतिमा तथा कैप्सूल की प्रतिकृति का अनावरण किया। अपने संबोधन में श्री झा ने माइन रेस्क्यू डे को राष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने की ईसीएल की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए आने वाले वर्षों में इसे अंतरराष्ट्रीय खदान बचाव दिवस के रूप में मान्यता दिलाने की आकांक्षा भी व्यक्त की।
इस अवसर पर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों नीलाद्रि रॉय, निदेशक (तकनीकी संचालन); गुंजन कुमार सिन्हा, निदेशक (कार्मिक) तथा सुश्री दीप्ति पटेल, मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के साथ विभिन्न क्षेत्रों के महाप्रबंधक एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन अशोक कुमार, महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं रेस्क्यू) तथा अभिजित कुंडू, अधीक्षक (रेस्क्यू), ईसीएल के मार्गदर्शन में किया गया। सभा को संबोधित करते हुए सुश्री दीप्ति पटेल ने 1989 के अद्वितीय बचाव अभियान में प्रदर्शित असाधारण सूझबूझ और संसाधनशीलता का उल्लेख किया। गुंजन कुमार सिन्हा ने एक रेस्क्यू प्रोफेशनल की चार अपरिहार्य विशेषताओं—साहस, संवेदनशीलता, दृढ़ विश्वास तथा संचार—का महत्व रेखांकित किया। वहीं, श्री नीलाद्रि रॉय ने रेस्क्यू-प्रशिक्षित कर्मियों की संख्या बढ़ाने तथा ईसीएल में ब्रिगेड संरचना को और सुदृढ़ करने के माध्यम से परिचालन तैयारियों को उन्नत किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर श्री झा ने ऑल इंडिया माइन रेस्क्यू प्रतियोगिता (AIMRC–2025) में भाग लेने वाले ईसीएल दल को प्रोत्साहित किया तथा कंपनी की पहली महिला माइन रेस्क्यू टीम का विशेष रूप से अभिनंदन करते हुए उन्हें उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं राष्ट्रीय स्तर पर गौरव प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन सभी अधिकारियों द्वारा खदान सुरक्षा एवं रेस्क्यू सेवाओं के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। यह संकल्प महान रेस्क्यू विशेषज्ञ डॉ. जे. एस. गिल की अमर विरासत को समर्पित था, जिनका साहस, नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा आज भी देशभर के रेस्क्यू कर्मियों को प्रेरित करती है।

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