गार्ड ऑफ ऑनर के साथ मिट्टी में विलीन हुए दुद्धी विधायक विजय सिंह गोंड

आदिवासी रीति-रिवाज से हुआ अंतिम संस्कार

NTPC

दुद्धी/सोनभद्र। उत्तर प्रदेश की अंतिम विधानसभा सीट 403 दुद्धी से आठ बार विधायक रहे, पूर्व मंत्री और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ आदिवासी नेता विजय सिंह गोंड का शुक्रवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। दोपहर लगभग दो बजे उनके पार्थिव शरीर को गार्ड ऑफ ऑनर देकर आदिवासी परंपरा और गोंड रीति-रिवाज के अनुसार मिट्टी में विलीन किया गया। अंतिम संस्कार उनके पैतृक आवास के बाहर स्थित निजी भूमि में किया गया।इससे पूर्व शुक्रवार तड़के सुबह विजय सिंह गोंड का पार्थिव शरीर दुद्धी कोतवाली क्षेत्र स्थित उनके पैतृक आवास पर पहुंचा, जहां सुबह से ही शुभचिंतकों, ईष्ट-मित्रों, रिश्तेदारों और समर्थकों का सैलाब उमड़ पड़ा। लोगों ने बारी-बारी से अंतिम दर्शन कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। सुबह शुरू हुआ अंतिम दर्शन दोपहर तक चलता रहा।

अंतिम दर्शन और संस्कार में समाज कल्याण मंत्री संजीव गोंड, छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री रामविचार नेताम, जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह, पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा, उपजिलाधिकारी निखिल यादव, क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार राय सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष रामनिहोर यादव, अविनाश कुशवाहा, रमेश दुबे, अनिल यादव, चेखुर पांडे, नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन, भाजपा नेता नरेंद्र कुशवाहा, श्रवण गोंड, मंडल अध्यक्ष दीपक शाह, प्रेमनारायण सिंह, म्योरपुर ब्लॉक प्रमुख मानसिंह गोंड, बसपा नेता संजय धुर्वे, रामविचार गौतम सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

अंतिम विदाई के दौरान हर आंख नम थी। लोगों ने कहा कि विजय सिंह गोंड जैसे नेता बार-बार जन्म नहीं लेते, जिन्होंने आदिवासियों के अधिकार और हितों की लड़ाई सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मजबूती से लड़ी।बताया गया कि विजय सिंह गोंड का निधन गुरुवार को लखनऊ स्थित संजय गांधी पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (एसजीपीजीआई) में हुआ था। वे लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। निधन की सूचना मिलते ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अस्पताल पहुंचे थे और उन्होंने अंतिम दर्शन कर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की थी।गोंड समाज की परंपरा के अनुसार पार्थिव शरीर को दफनाए जाने के बाद उसी स्थान पर समाधि स्थल विकसित किया जाएगा, जो आने वाली पीढ़ियों और आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

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