सोनभद्र । ओबरा तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं का आरोप लगाया। अधिवक्ता संघर्ष समिति तहसील ओबरा के बैनर तले दर्जनों अधिवक्ताओं ने नारेबाजी कर विरोध जताया और उपजिलाधिकारी ओबरा के नाम स्टेनो को ज्ञापन सौंपकर दस प्रमुख मांगों को तत्काल पूरा करने की मांग की।अधिवक्ताओं का कहना था कि तहसील ओबरा में इन दिनों भ्रष्टाचार चरम पर है और कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबे समय से लंबित पड़ी हैं, जिससे अधिवक्ताओं और वादकारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि न्यायालय में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को सहज और सरल बनाया जाए, ताकि वादकारियों को सुलभ और त्वरित न्याय मिल सके।अधिवक्ताओं ने आरके कार्यालय में परवाना को आर-6 रजिस्टर और कंप्यूटर प्रणाली से जोड़कर क्रमवार समय तय करने की भी मांग की, ताकि वहां व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। इसके अलावा तहसील परिसर में अधिवक्ताओं और वादकारियों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तत्काल करने की मांग उठाई गई।

ज्ञापन में यह भी कहा गया कि उप निबंधन कार्यालय ओबरा और आपूर्ति कार्यालय को तत्काल तहसील परिसर में स्थापित किया जाए, जिससे लोगों को एक ही स्थान पर सुविधाएं मिल सकें और अनावश्यक भ्रष्टाचार पर रोक लग सके। साथ ही तहसील परिषद ओबरा में निर्मित कैंटीन और फोटोस्टेट की दुकानों का टेंडर प्रक्रिया पूरी कर उन्हें जल्द संचालित कराने की भी मांग की गई, ताकि अधिवक्ताओं और वादकारियों को होने वाली असुविधा दूर हो सके।अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सात दिन बाद अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट उमेश चंद शुक्ला ने किया। इस दौरान संजीत चौबे, बीएन जायसवाल, सतीश पांडेय, अनिल मिश्रा, कपूर चंद पांडेय, संजय दुबे, सुशील कुमार शर्मा, विमलेश, मनीष मिश्रा, कर्मवीर, अमित उपाध्याय, कौशल पांडेय, अनुज त्रिपाठी, सुशील पांडेय और नागेश्वर पांडेय सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।

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