रायपुर/ हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचएनएलयू), रायपुर ने छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस (राज्योत्सव) के अवसर पर विश्वविद्यालय पुस्तकालय में एक विशेष पुस्तक एवं कला प्रदर्शनी का आयोजन किया। यद्यपि विश्वविद्यालय नियमित रूप से पुस्तक प्रदर्शनियाँ आयोजित करता है, किंतु इस बार की प्रदर्शनी विशेष थी इसका उद्देश्य राज्य स्थापना दिवस को संस्कृति और कला के दृष्टिकोण से मनाना था। यह आयोजन लर्निंग रिसोर्सेज कमेटी (एलआरसी) और एचएनएलयू के छात्रों के संयुक्त प्रयासों से, प्रो. (डॉ.) विष्णु कोनूरायर, फैकल्टी संयोजक, एलआरसी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की विशेषताएँ
प्रदर्शनी में कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन, कुलसचिव डॉ. दीपक कुमार श्रीवास्तव, प्रो. (डॉ.) विष्णु कोनूरायर, एवं अन्य प्राध्यापकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्रदर्शनी में स्थानीय कलाकारों की चित्रकृतियों का मनमोहक प्रदर्शन किया गया, जिनमें छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता को जीवंत रूप में चित्रित किया गया था।
चित्रों के साथ-साथ प्रदर्शनी में पुस्तकों का चयनित संकलन भी प्रस्तुत किया गया, जिनमें राज्य की समृद्ध परंपराओं, जनजातीय व्यंजन, लोक-रीतियों, और बस्तर दशहरा जैसे प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों पर केंद्रित सामग्री प्रदर्शित की गई।
इन पुस्तकों और कलाकृतियों की व्यवस्था ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (टीआरटीआई), नया रायपुर के सहयोग से की गई थी।
कुलपति का अभिभाषण
कुलपति प्रो. (डॉ.) वी. सी. विवेकानंदन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदर्शनी अकादमिक समुदाय को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक उत्कृष्ट प्रयास है। उन्होंने प्रदर्शनी में प्रदर्शित स्थानीय चित्रों और क्षेत्रीय व्यंजनों पर आधारित पुस्तकों की प्रशंसा की और राज्योत्सव दिवस के अवसर पर सभी को शुभकामनाएँ दीं। कुलपति ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खाद्य संस्कृति पर भी अपने विचार साझा किए और प्रदर्शनी के विषयों के साथ आत्मीय संवाद किया।
अन्य प्रतिभागी एवं छात्र सहभागिता
कार्यक्रम में उपस्थित प्राध्यापकों ने भी राज्य की कला, संस्कृति और विरासत पर अपने अनुभव और विचार साझा किए, जिससे एक समृद्ध सांस्कृतिक संवाद का वातावरण बना। एचएनएलयू के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की और प्रदर्शनी के प्रति अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। अनेक छात्रों ने कहा कि यह प्रदर्शनी न केवल सुसंगठित और सूचनाप्रद थी, बल्कि इससे उन्हें छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत के प्रति नई समझ और सम्मान प्राप्त हुआ।

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