आधुनिक युग के महानायक पिताश्री ब्रह्मा बाबा का मनाया अव्यक्त आरोहण दिवस

 रॉबर्ट्सगंज के विकास नगर स्थित ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में हुआ आयोजन

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सोनभद्र। (जी.जी.न्यूज) आदि सनातन दैवी सांस्कृतिक उत्कर्ष के आधुनिक युग के महानायक और ईश्वरीय चेतना के अवतार पिता श्री ब्रह्मा बाबा का 57 वॉ अव्यक्त आरोहण दिवस ब्रह्माकुमारीज के विकास नगर स्थित स्थानीय सेवा केंद्र पर विश्व शांति दिवस के रूप में मनाया गया। परमात्मा शिव के दिव्य साक्षात्कार के बाद हुए आध्यात्मिक परिवर्तन के फलस्वरूप पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने सनातन संस्कृति का ध्वजवाहक बनकर संपूर्ण मानवता को एक नई राह दिखाया। उन्होंने  अपनी संपूर्ण चल और अचल संपत्ति को ईश्वरीय सेवार्थ समर्पित कर नारियों का आध्यात्मिक सशक्तिकरण करने के लिए विश्व विख्यात संस्था प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सन 1936 में स्थापना किया। प्रारंभ के 14 वर्षों तक तपस्या करने के बाद ब्रह्माकुमारीज संस्था के सदस्य मानवता की सेवा के लिए सामाजिक संपर्क में आए। वर्तमान समय में ब्रह्माकुमारीज संस्था विश्व के 5 महाद्वीपों में 140 से  अधिक देशों में मानवता के दिव्यीकरण की सेवा कर रही है। विश्व शांति और मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना की दिशा में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा ब्रह्माकुमारीज संस्था को शांतिदूत पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। 18 जनवरी 1969 को युगद्रष्टा ब्रह्मा बाबा ने अपने नश्वर देह का त्याग कर संपूर्णता को प्राप्त किया था। वर्तमान समय में भी पिताश्री ब्रह्मा बाबा अपनी सूक्ष्म और दिव्य उपस्थिति से निरंतर दैवी सनातन संस्कृति के उत्थान हेतु संपूर्ण मानवता का मार्गदर्शन कर रहे हैं।स्थानीय सेवाकेंद्र पर 14 घंटे का अखंड योग भट्टी और मौन साधना का कार्यक्रम चला। पिताश्री ब्रह्मा बाबा के प्रति पुष्पांजलि अर्पित करके जनपद के विभिन्न भागों से बड़ी संख्या में पधारे श्रद्धालुओं ने व्यक्तिगत जीवन में सनातन सांस्कृतिक मूल्यों को धारण कर स्वर्णिम और सशक्त भारत के नवनिर्माण के लिए संकल्प लेकर अखंड योग साधनारत रहे। सेवाकेंद्र की मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारी सुमन दीदी के मार्गदर्शन में सभी कार्यक्रम संपन्न हुए। कार्यक्रम को सफल बनाने में बीके सरोज, बी.के कविता, बी.के दीपशिखा, बी के हरेन्द्र, बी.के गोपाल, रामप्रवेश भाई, हरिशंकर भाई, नीरज बहन, रुक्मणि बहन, प्रभा बहन, सिया बहन ने सक्रिय योगदान दिया।

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