ऐसे समय में जब दुनिया भारी अनिश्चितता के दौर में है, भारत अद्भुत निश्चितता के साथ आगे बढ़ रहा है – प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजकोट में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया

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भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है – प्रधानमंत्री

भारत की ग्रोथ से जुड़ी फैक्ट शीट रिफॉर्म-परफॉर्म-ट्रांसफॉर्म मंत्र की सफलता की गाथा है: प्रधानमंत्री

इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ, इंडस्ट्री की जरूरतों के लिए तैयार वर्कफोर्स आज की सबसे बड़ी जरूरत है: प्रधानमंत्री

आज का भारत विकसित राष्ट्र बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है, इस लक्ष्य को हासिल करने में रिफॉर्म एक्सप्रेस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है: प्रधानमंत्री
राजकोट/ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के राजकोट में कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि 2026 की शुरुआत के बाद गुजरात की यह उनकी पहली यात्रा है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आज सुबह उन्होंने भगवान सोमनाथ के दिव्य दर्शन किए और अब वे राजकोट के इस भव्य कार्यक्रम में सहभागिता कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज हर तरफ “विकास भी, विरासत भी” का मंत्र गूंज रहा है। प्रधानमंत्री ने देश और दुनिया भर से वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट में भाग लेने आए सभी सहयोगियों का स्वागत किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

वाइब्रेंट गुजरात समिट के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जब भी इस सम्मेलन का मंच सजता है, तो वे इसे केवल एक कार्यक्रम के तौर पर नहीं देखते। उनके लिए यह 21वीं सदी के आधुनिक भारत की वह गौरवशाली यात्रा है, जो एक सपने के साथ शुरू हुई थी और आज अटल विश्वास के शिखर पर पहुँच चुकी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पिछले दो दशकों में वाइब्रेंट गुजरात की यह यात्रा एक वैश्विक मानक बन गई है। उन्होंने कहा कि अब तक आयोजित इसके दस संस्करणों ने न केवल इस शिखर सम्मेलन की पहचान को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है, बल्कि वैश्विक पटल पर इसकी भूमिका को भी निरंतर सशक्त किया है।

वाइब्रेंट गुजरात समिट के साथ अपने पहले दिन से जुड़ाव को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके बदलते स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में इसका लक्ष्य दुनिया को गुजरात की क्षमताओं से परिचित कराना था, ताकि लोग यहाँ आएँ, निवेश करें और इससे भारत के साथ-साथ वैश्विक निवेशकों को भी लाभ हो। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज यह सम्मेलन केवल निवेश तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक विकास, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और साझेदारी का एक सशक्त मंच बन चुका है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले वर्षों में वैश्विक भागीदारों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है, जो इस सम्मेलन के समावेशी स्वरूप का एक बड़ा प्रमाण है। श्री मोदी ने कहा कि आज इस मंच पर कॉर्पोरेट समूह, सहकारी संस्थाएं, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, मल्टीलेटरल और बाइलेटरल संगठन तथा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान—सभी एक साथ आते हैं। वे यहाँ न केवल संवाद और चर्चा करते हैं, बल्कि गुजरात की विकास यात्रा में कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पिछले दो दशकों में वाइब्रेंट गुजरात समिट ने लगातार कुछ नया और विशेष पेश करने की परंपरा कायम रखी है। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट इस परंपरा का एक और उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्रीय सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गुजरात के विभिन्न हिस्सों में छिपी हुई अप्रयुक्त क्षमताओं को परफॉर्मेंस में बदलना है। श्री मोदी ने रेखांकित किया कि गुजरात के हर क्षेत्र की अपनी विशिष्ट ताकत है। कहीं विशाल कोस्टल लाइन की शक्ति है, तो कहीं एक लंबी ट्राइबल बेल्ट का विस्तार है। कहीं औद्योगिक क्लस्टरों का एक बड़ा इकोसिस्टम है, तो कहीं खेती और पशुपालन की समृद्ध परंपरा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गुजरात का प्रत्येक क्षेत्र अपनी अलग विशिष्टता रखता है और यह रीजनल समिट इन्हीं स्थानीय संभावनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा, “भारत की ग्रोथ फैक्ट शीट दरअसल ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र की सफलता की कहानी है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पिछले 11 वर्षों में भारत दुनिया में मोबाइल डेटा का सबसे बड़ा उपभोक्ता बन गया है, और यूपीआई वैश्विक स्तर पर नंबर वन रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन प्लेटफॉर्म के रूप में उभरा है। पुरानी स्थिति को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले दस में से नौ मोबाइल फोन आयात किए जाते थे, लेकिन आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि अब भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है, सोलर पावर जनरेशन में टॉप तीन देशों में शामिल है, तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है, और दुनिया के टॉप तीन मेट्रो नेटवर्क में से एक है।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज दुनिया का हर विशेषज्ञ और संस्थान भारत को लेकर बेहद उत्साहित है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ भारत को वैश्विक विकास का इंजन मान रहा है, एसएंडपी ने अठारह वर्षों के बाद भारत की रेटिंग अपग्रेड की है और फिच रेटिंग्स ने भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता व राजकोषीय विश्वसनीयता की सराहना की है।

प्रधानमंत्री ने सौराष्ट्र और कच्छ की औद्योगिक ताकत की सराहना करते हुए कहा कि आज ये क्षेत्र केवल अवसरों के क्षेत्र नहीं रह गए हैं, बल्कि भारत की विकास यात्रा के मुख्य आधार बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि ये क्षेत्र आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने वाले प्रमुख केंद्र बन रहे हैं और भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह विकास पूरी तरह से मार्केट-ड्रिवन है, जो निवेशकों में एक नया आत्मविश्वास पैदा करता है। प्रधानमंत्री ने राजकोट की औद्योगिक विविधता का उल्लेख करते हुए बताया कि अकेले राजकोट में 2.5 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हैं। यहाँ के विभिन्न औद्योगिक क्लस्टरों में स्क्रूड्राइवर से लेकर ऑटो पार्ट्स, मशीन टूल्स और लग्जरी कारों के लाइनर्स तक बनाए जाते हैं। इतना ही नहीं, अब यहाँ हवाई जहाज, लड़ाकू विमान और रॉकेट के पुर्जे भी निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि यह क्षेत्र कम लागत वाली मैन्युफैक्चरिंग से लेकर हाई-प्रिसिजन और हाई-टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग तक की पूरी वैल्यू चेन को सपोर्ट करता है। साथ ही, यहाँ का आभूषण उद्योग दुनिया भर में प्रसिद्ध है, जो स्केल, स्किल और ग्लोबल लिंकेज का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र अब भारत की ग्रीन ग्रोथ, ग्रीन मोबिलिटी और ऊर्जा सुरक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि कच्छ में 30 गीगावाट क्षमता का रिन्यूएबल एनर्जी पार्क विकसित किया जा रहा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा हाइब्रिड ऊर्जा पार्क होगा। उन्होंने इसकी विशालता को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह पार्क पेरिस शहर से पांच गुना बड़ा होगा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इस क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा केवल एक प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि एक कमर्शियल लेवल की वास्तविकता बन चुकी है। श्री मोदी ने बताया कि कच्छ और जामनगर ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन के बड़े केंद्र बन रहे हैं। इसके साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा के साथ-साथ ग्रिड की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कच्छ में एक विशाल बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी स्थापित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने सौराष्ट्र और कच्छ की एक और बड़ी ताकत के रूप में यहाँ के वर्ल्ड-क्लास पोर्ट्स का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं बंदरगाहों के माध्यम से दुनिया भर में पहुँचता है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से बताया कि पीपावाव और मुंद्रा पोर्ट अब ऑटोमोबाइल निर्यात के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि पिछले वर्ष गुजरात के बंदरगाहों से लगभग 1.75 लाख वाहनों का निर्यात किया गया है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि यहाँ केवल लॉजिस्टिक्स ही नहीं, बल्कि बंदरगाह आधारित विकास के हर पहलू में निवेश के अनंत अवसर मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री ने बताया कि गुजरात सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है और सीफूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में निवेशकों के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया गया है।

प्रधानमंत्री ने कौशल विकास पर जोर देते हुए कहा, “इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ, आज की सबसे बड़ी जरूरत इंडस्ट्री-रेडी वर्कफोर्स है।” उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि गुजरात इस मोर्चे पर पूरी निश्चितता प्रदान करता है, क्योंकि यहाँ शिक्षा और कौशल विकास के लिए एक बेहतरीन अंतरराष्ट्रीय इकोसिस्टम मौजूद है।

प्रधानमंत्री ने गुजरात की पर्यटन क्षमता पर चर्चा करते हुए कहा कि राज्य प्रकृति, एडवेंचर, संस्कृति और विरासत का एक अनूठा संगम है, जो पर्यटकों को एक पूर्ण अनुभव प्रदान करता है। उन्होंने भारत की 4,500 साल पुरानी समुद्री विरासत के प्रतीक लोथल का उल्लेख करते हुए बताया कि यहाँ दुनिया का सबसे पुराना मानव निर्मित डॉकयार्ड स्थित है, जहाँ अब नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स विकसित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कच्छ के रण उत्सव का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ की टेंट सिटी दुनिया भर के पर्यटकों को एक अद्भुत अनुभव दे रही है। वन्यजीव प्रेमियों के लिए उन्होंने गीर के जंगलों की विशेषता बताई, जहाँ एशियाई शेरों को देखने के लिए हर साल नौ लाख से अधिक पर्यटक आते हैं। समुद्र तट पर्यटन पर चर्चा करते हुए श्री मोदी ने कहा कि शिवराजपुर बीच, जो ब्लू फ्लैग सर्टिफाइड है, के साथ-साथ मांडवी, सोमनाथ और द्वारका में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पास ही स्थित दीव अब वाटर स्पोर्ट्स और बीच गेम्स के लिए एक प्रमुख वैश्विक गंतव्य के रूप में उभर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी निवेशकों को विश्वास दिलाते हुए कहा कि भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस अब थमने वाली नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की सुधारों की यात्रा अब संस्थागत परिवर्तन की ओर बढ़ चुकी है, जो विकास को एक स्थायी और मजबूत आधार प्रदान करेगी। प्रधानमंत्री ने निवेशकों से संवाद करते हुए कहा कि यहाँ उपस्थित प्रतिभागी केवल एक एमओयू के लिए नहीं आए हैं, बल्कि वे सौराष्ट्र-कच्छ के विकास और यहाँ की समृद्ध विरासत के साथ जुड़ने आए हैं। श्री मोदी ने निवेशकों को पूर्ण भरोसा देते हुए कहा कि यहाँ निवेश किया गया आपका एक-एक रुपया बेहतरीन रिटर्न देगा। उन्होंने सभी निवेशकों को अपनी शुभकामनाएं दीं और इस शिखर सम्मेलन का हिस्सा बनने के लिए उनका आभार व्यक्त किया।

राजकोट के प्रतिष्ठित उद्योगपति और ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, पराक्रमसिंह जी जडेजा ने कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के असाधारण विजन और नेतृत्व की सराहना करते हुए बताया कि कैसे वाइब्रेंट गुजरात पहल के माध्यम से उन्होंने गुजरात को भारत के ग्रोथ इंजन के रूप में परिवर्तित कर दिया है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया । अडानी पोर्ट्स और एसईजेड के प्रबंध निदेशक करण अडानी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के परिवर्तनकारी नेतृत्व को रेखांकित किया, जिसने भारत के पैमाने और मानसिकता को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत एक बिखरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच एक ब्राइट स्पॉटके रूप में उभरा है, जो 8 प्रतिशत के करीब विकास दर के साथ अपने विनिर्माण आधार का विस्तार कर रहा है और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था व दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।

अपने विचार साझा करते हुए वेलस्पन ग्रुप के चेयरमैन बी.के. गोयनका ने गुजरात, विशेषकर कच्छ और सौराष्ट्र के कायाकल्प में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो क्षेत्र कभी अभाव और आपदाओं के लिए जाने जाते थे, आज वे विश्व स्तरीय रिफाइनरियों, बंदरगाहों, कपड़ा उद्योग और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रतीक बन चुके हैं। उन्होंने इस परिवर्तन का पूरा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और दृढ़ संकल्प को दिया, जिसने गुजरात को एक नई पहचान दी है। उन्होंने श्री मोदी के उस संकल्प की प्रशंसा की जिसमें उन्होंने कहा था— “आपका सपना जितना बड़ा होगा, मेरी प्रतिबद्धता भी उतनी ही बड़ी होगी।” उन्होंने नए सपनों, नए संकल्पों और निरंतर उपलब्धियों के प्रधानमंत्री के आह्वान को दोहराते हुए अपनी बात समाप्त की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आज हम सबके सामने चुनौती न केवल भारत को आत्मनिर्भर बनाने की है, बल्कि 2047 तक इसे एक विकसित राष्ट्र में परिवर्तित करने की भी है।

अपने विचार साझा करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और दृष्टिकोण का उत्सव है। उन्होंने भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास को पुनर्जीवित करने और देश में अभूतपूर्व विश्वास एवं जीवंतता के युग की शुरुआत करने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को दिया। श्री अंबानी ने इस बात पर जोर दिया कि इतिहास मोदी युग को उस समय के रूप में याद रखेगा जब भारत क्षमता से प्रदर्शन, आकांक्षा से कार्यान्वयन और एक अनुगामी से वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ा। उन्होंने रिलायंस के लिए गुजरात के विशेष स्थान को रेखांकित करते हुए इसे कंपनी का शरीर, हृदय और आत्मा बताया। इसी के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुरूप पाँच मजबूत प्रतिबद्धताओं की भी घोषणा की।

इस अवसर पर बोलते हुए, भारत में रवांडा की उच्चायुक्त महामहिम सुश्री जैकलिन मुकांगिरा ने वाइब्रेंट गुजरात रीजनल समिट में रवांडा को कंट्री पार्टनर के रूप में आमंत्रित करने के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। सुश्री मुकांगिरा ने रवांडा का वर्णन एक तेजी से विकसित हो रहे और स्थिर राष्ट्र के रूप में किया, जहाँ भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाती है। उन्होंने बताया कि रवांडा गवर्नेंस की पारदर्शिता और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में अफ्रीका में प्रथम स्थान पर है और वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में देश ने 11.8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर दर्ज की है। भारत में यूक्रेन के राजदूत महामहिम डॉ. ओलेक्जेंडर पॉलिशचुक ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की हृदय से सराहना की। उन्होंने श्री मोदी की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि एक क्षेत्रीय नेता से राष्ट्रीय व्यक्तित्व और अब एक वैश्विक राजनेता के रूप में उनकी यात्रा अद्वितीय है, जिसमें शांति स्थापित करने के उनके वैश्विक प्रयास भी शामिल हैं।

उन्होंने गुजरात सरकार और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के प्रति उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा, संस्थागत साझेदारी और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग को रेखांकित किया, जो दोनों देशों के बीच जन-संपर्क और ज्ञान-आधारित संबंधों को मजबूत करते हैं। डॉ. पॉलिशचुक ने याद दिलाया कि यूक्रेन ने वाइब्रेंट गुजरात समिट 2023 में एक साझेदार देश के रूप में गर्व के साथ हिस्सा लिया था और वह इसे आर्थिक सहयोग को गहरा करने के एक रणनीतिक अवसर के रूप में देखता है। उन्होंने बताया कि यूक्रेनी उद्योग वर्तमान में कृषि, इंजीनियरिंग, आईटी, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहले ही $4 बिलियन तक पहुँच चुका है।

डॉ. पोलिशचुक ने भारतीय कंपनियों को पोलैंड में आगामी यूक्रेन रिकवरी कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने औद्योगिक और तकनीकी सहयोग के विस्तार की संभावनाओं पर जोर दिया, जिसमें मेक इन इंडिया फ्रेमवर्क के तहत रक्षा क्षेत्र में साझेदारी भी शामिल है। उन्होंने उल्लेख किया कि युद्ध काल के दौरान वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की यूक्रेन की ऐतिहासिक यात्रा ने राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने के संकल्प को पुनः पुख्ता किया है। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि यूक्रेन में स्थायी शांति की स्थापना से भारत-यूक्रेन संबंधों में और अधिक प्रगाढ़ता आएगी, जिसमें गुजरात के साथ साझेदारी भी शामिल है। अंत में, उन्होंने सार्थक चर्चाओं और मजबूत नई साझेदारियों को बढ़ावा देने के लिए वाइब्रेंट गुजरात समिट की सफलता की कामना की। इस आयोजन में अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने 14 ग्रीनफील्ड स्मार्ट गुजरात इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (जीआईडीसी) एस्टेट्स विकसित करने की घोषणा की और राजकोट में जीआईडीसी के मेडिकल डिवाइस पार्क का उद्घाटन भी किया।

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन 11 और 12 जनवरी 2026 को किया जा रहा है, जो विशेष रूप से कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्रों के 12 जिलों पर केंद्रित है। विशेष रूप से इन्हीं क्षेत्रों के लिए समर्पित यह सम्मेलन, पश्चिमी गुजरात में निवेश और औद्योगिक विकास को एक नई गति देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। ये रीजनल कॉन्फ्रेंस न केवल क्षेत्रीय उपलब्धियों को प्रदर्शित करने और नई पहलों की घोषणा करने के लिए एक प्लेटफ़ॉर्म के रूप में कार्य करेंगी, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाकर, नवाचार को बढ़ावा देकर और राज्य के हर हिस्से में रणनीतिक निवेश को सुगम बनाकर गुजरात की विकास गाथा को मिलकर लिखने के साधन के रूप में भी काम करेंगे। इन रीजनल कॉन्फ्रेंस की उपलब्धियों को जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के अगले संस्करण के दौरान प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।

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