*ग्रामीण महिलाओं को मिला आत्मनिर्भरता का नया अवसर

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में अमृत सरोवर योजना जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण का एक मजबूत आधार बनकर उभर रही है। योजना के अंतर्गत विकसित जलस्रोत जहां भू-जल स्तर बढ़ाने में सहायक हैं, वहीं स्थानीय समुदाय, विशेषकर महिलाओं को रोजगार और आय सृजन के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं।
सरगुजा संभाग के अंबिकापुर के ग्राम पंचायत बरगंवा में अमृत सरोवर योजना अंतर्गत निर्मित तालाब इसका सफल उदाहरण है। तालाब का उपयोग सरस्वती महिला स्व सहायता समूह द्वारा मछली पालन के लिए किया जा रहा है, जिससे समूह की महिलाओं को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हुआ है और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना बनी है।
ग्राम पंचायत बरगंवा की सरपंच श्रीमती संजिता सिंह ने बताया कि अमृत सरोवर के निर्माण से गांव के जल स्तर में सकारात्मक सुधार दर्ज हुआ है। आसपास के कुओं एवं अन्य जल स्रोतों में जल की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे ग्रामीणों को पेयजल एवं सिंचाई में सहूलियत मिल रही है। उन्होंने कहा कि तालाब का प्रबंधन महिला स्व सहायता समूह को सौंपने से आजीविका संवर्धन का एक सशक्त माध्यम तैयार हुआ है। समूह की महिलाओं द्वारा तालाब में लगभग 4,000 मछली बीज डाले गए हैं। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप यह गतिविधि भविष्य में आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनेगी। मछली पालन के जरिए महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे स्वयं के श्रम, कौशल और सहभागिता से आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
सरपंच श्रीमती सिंह ने कहा कि अमृत सरोवर योजना जल संरक्षण, पर्यावरणीय संवर्धन और ग्रामीण आजीविका सृजन का प्रभावी मॉडल साबित हो रही है। इससे गांवों में नए रोजगार सृजित हो रहे हैं और स्थानीय महिलाओं की सहभागिता के कारण सामाजिक एवं आर्थिक विकास को गति मिल रही है। महिला स्व सहायता समूह की सदस्यों ने भी शासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि तालाब निर्माण और मछली पालन ने उन्हें सम्मानजनक और दीर्घकालिक आजीविका का अवसर दिया है। योजना से गांव में समग्र विकास की नई दिशा स्थापित हो रही है और महिलाएं आत्मविश्वास व सशक्तिकरण के साथ आगे बढ़ रही हैं।

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