आखिर कब हटेगा बन क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण कर बनाया गया अवैध टोल प्लाजा 

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बन क्षेत्र में स्थित अवैध टोल प्लाजा के कार्यालय वर्क शाप को लेकर एन जी टी में किया गया है अपील 

अहरौरा, मिर्जापुर/ वाराणसी शक्ति नगर रोड पर चुनार रेंज के ग्राम बेलखरा ग्राम पंचायत में वन आरक्षित भूमि पर से नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बावजूद आधे अधूरे क्षेत्र से अवैध अतिक्रमण हटवा कर बनविभाग ने एन जी टी को चार हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराए जाने की रिपोर्ट दी है l 

टोल प्लाजा द्वारा बन विभाग में किए गए अवैध अतिक्रमण को लेकर  एन जी टी में वाद दाखिल करने वाले चौधरी यशवंत सिंह ने बताया की ए.सी. पी. टोल वेज ने ग्राम बेलखरा, अहरौरा में वन आरक्षित भूमि पर अवैध अतिक्रमण करते हुए टोल प्लाजा , हाट मिक्स प्लांट एवं अन्य निर्माण कर लिया है l 

 जिलाधिकारी ने एन जी टी को एक शपथ पत्र के माध्यम से अवगत कराया है कि एन जी टी के आदेशानुसार प्रभागीय वनाधिकारी मिर्जापुर की अध्यक्षता में एक चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है ।उन्होंने एन जी टी को बताया कि कमेटी द्वारा दाखिल रिपोर्ट के अनुसार 7.79 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि पर अतिक्रमण पाया गया जिसमें से 3.79 हेक्टेयर भूमि पर जिला जज द्वारा स्थगन आदेश जारी किया गया है l 

 वादी मुकदमा चौधरी यशवंत सिंह ने बताया कि वन विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि प्रतिवादियों द्वारा 4 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण किया गया है l उन्होंने बताया कि जाँच के पश्चात् प्रभागीय वनाधिकारी ने दिनांक 16 जुलाई 2024 को जारी एक आदेश द्वारा प्रतिवादियों को आदेश दिया कि 15 दिनों के अंदर वन भूमि पर से अवैध अतिक्रमण हटा लें l

 उक्त आदेश के विरुद्ध विपक्षियों द्वारा चीफ कंजरवेटर मिर्जापुर परिक्षेत्र के समक्ष एक अपील दाखिल की गई लेकिन उन्होंने दिनांक 16 मई 2025 को उक्त अपील को निरस्त कर दिया और प्रतिवादी को वन भूमि पर से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया l यशवंत सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी ने अपने शपथ पत्र में बताया है कि एन जी टी के आदेशानुसार 4 हेक्टेयर भूमि पर से अतिक्रमण हटाया जा चुका है l 

   यशवंत सिंह ने बताया कि मौके पर आधा अधूरा अतिक्रमण हटाया गया है और हाटमिक्स प्लांट , धर्मकांटा, टिन शेड एवं गिट्टी का भंडारण अभी भी आरक्षित वन क्षेत्र में है जिसे हटाया नहीं गया है l

 सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार वन भूमि के मामले में किसी भी निचली अदालत के आदेश मान्यटी नहीं हैं केवल सर्वोच्च न्यायालय और भारत सरकार की वन्य जीव विभाग का ही आदेश मान्य है l

 इन परिस्थितियों में अतिक्रमित की गई पूरी 7.79 हेक्टेयर भूमि पर से अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए l

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