सोनभद्र। पश्चिमी विक्षोभ के चलते मौसम में हुए अचानक परिवर्तन से क्षेत्र में हुई बरसात से रबी फसलों को क्षति पहुँचने की आशंका से किसानों की धड़कनें बढ़ने लगी हैं। किसानों में डर है कि कहीं ख़रीफ़ फ़सल की तरह रबी फ़सल पर भी ख़तरा ना मंडरा जाए, नहीं तो अन्नदाताओं की कमर पूरी तरह टूट जाएगी और आर्थिक बोझ से दब जाएंगे।
बीती रात गरज-चमक के साथ हुई बेमौसमी बरसात से गेहूं सहित दलहनी, तिलहनी फसलों को नुक़सान पहुंचा है। बारिश के साथ चली हवाओं से गेहूं की खड़ी कुछ फसलें जहाँ गिर गई हैं, वहीं पककर तैयार मटर, मसूर, चना व सरसों आदि फसलों को भी क्षति पहुंची है। इनके फल चटक सकते हैं और दाने काले हो जाएंगे। पैदावार पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता हैं। चैत्र मास में रबी फसलों के लिए यह मौसम पूरी तरह हानिकारक साबित हुआ है। शनिवार को भी आसमान में बादल छाए रहने से किसानों में चिंता बढ़ी है। ढुटेर गाँव के विजय कुमार मौर्य, गिरजा सिंह, विनोद कुमार मौर्य, छविंद्र, रामविलास सिंह, संजय सिंह ,आशिष सिंह आदि किसानों का कहना है कि मौसम की बेरूखी से डर है कि यह ख़रीफ़ फ़सल की तरह रबी फ़सल के लिए भी मुसीबत न बन जाए। क्योंकि धान की भांति गेहूं सहित दलहनी, तिलहनी की फसल भी पकने के कगार पर है। कहीं-कहीं इन फसलों की कटाई भी शुरू हो गई है।


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