नागपुर । केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री, जी किशन रेड्डी ने अपने प्रवास के द्वितीय दिवस 14 मार्च, 2026 को वेकोलि की मुरपार भूमिगत खदान के खदान बंदी प्रक्रिया का निरीक्षण किया। इस दौरान माननीय मंत्री महोदय ने मुरपार भूमिगत खदान में खदान बंदी से संबंधित विभिन्न कार्यों एवं उनकी प्रगति का अवलोकन किया। इस खदान में वर्ष 2003 से कोयला उत्पादन प्रारंभ हुआ था तथा वर्ष 2022 में ताडोबा-अंधेरी टाइगर रिजर्व के इको-सेंसिटिव जोन घोषित होने के कारण इस खदान को बंद किया गया। इस अवसर पर अपने संवाद में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि खदान बंदी किसी परियोजना का अंत नहीं, बल्कि सतत विकास की दिशा में एक नई शुरुआत है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि खदान बंदी की प्रक्रिया को वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित ढंग से लागू किया जाना चाहिए, ताकि खनन के पश्चात क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन की पुनर्स्थापना तथा प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

रेड्डी ने आगे कहा कि खदान बंदी योजनाओं में स्थानीय समुदायों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रोत्साहित विभिन्न पहलों के माध्यम से बंद हो चुकी खदानों को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से उपयोगी परिसंपत्तियों में बदलने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुरपार भूमिगत खदान के विषय में जानकारी देते हुए वेकोलि के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहान ने बताया कि यह खदान महाराष्ट्र राज्य के चंद्रपुर जिले के चिमूर तहसील में स्थित इस खदान के स्थापना से अब तक लगभग 9,95,926 टन कोयले का उत्पादन किया गया। खदान के लिए अंतिम माइन क्लोजर प्लान को वेकोलि बोर्ड द्वारा 19 जनवरी 2026 को स्वीकृति प्रदान की गई है। खदान में कार्यरत लगभग 426 कर्मचारियों को उमरेर क्षेत्र की अन्य खदानों में पुनः पदस्थापित किया गया है।
उन्होंने बताया कि मुरपार खदान में सभी खनन अवसंरचनाओं को नियमानुसार हटाया जा चुका है, जबकि प्रबंधक कार्यालय और कैंटीन भवन को जिला प्रशासन की अनुशंसा पर सामाजिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा गया है। खदान बंदी से संबंधित सभी भौतिक कार्य तथा तीन वर्षों की पर्यावरणीय निगरानी भी पूरी की जा चुकी है।
पर्यावरण संरक्षण के तहत खदान क्षेत्र की 5 हेक्टेयर भूमि पर वृक्षारोपण का कार्य ट्रॉपिकल फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, जबलपुर के सहयोग से जून से सितंबर 2026 के दौरान किया जाएगा। आसपास के गांवों के लोगों के लिए 8 निःशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन भी किया गया, जिनसे लगभग 715 लाभार्थियों को लाभ मिला।
चंद्रपुर जिला प्रशासन द्वारा 12 जून 2025 को माइन क्लोजर एडवाइजरी कमेटी (एमसीएसी) का गठन किया गया, जिसके माध्यम से खदान बंदी के बाद क्षेत्र के सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों के हितों को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार की गई। साथ ही खदान बंदी के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन करने तथा कम्युनिटी डेवलपमेंट एंड लाइवलीहुड प्लान तैयार करने के लिए सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट की प्रक्रिया भी प्रारंभ की गई है।
मुरपार भूमिगत खदान के निरीक्षण के पश्चात केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री ने चिमूर नगर-पालिका कार्यालय में जिला कलेक्टर एवं माइन क्लोजर एडवाइजरी कमेटी के साथ बैठक की। इस दौरान वेकोलि के माइन क्लोजर नोडल अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं, सलाहकारों तथा स्थानीय गांवों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में खदान बंदी के पश्चात क्षेत्र के समग्र एवं सतत विकास के विषय में विचार-विमर्श किया गया।
इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के अपर सचिव सनोज कुमार झा, कोयला एवं खान मंत्री के निजी सचिव डॉ. पंकज जैन, आईएएस,कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष बी. साईराम, कोल कंट्रोलर सजीश कुमार एन, कोयला मंत्रालय के निदेशक (तकनीकी) बिरेन्द्र कुमार ठाकुर, कोयला और खान मंत्री के अपर निजी सचिव ए.वेंकटेश्वर रेड्डी, आईपीओएस, वेकोलि के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहान, निदेशक (वित्त) बिक्रम घोष, निदेशक तकनीकी (संचालन) आनंदजी प्रसाद, निदेशक (मानव संसाधन) डॉ. हेमंत शरद पांडे, निदेशक तकनीकी (परियोजना एवं योजना) संदीप परांजपे तथा मुख्य सतर्कता अधिकारी अजय मधुकर म्हेत्रे सहित उमरेड के क्षेत्रीय महाप्रबंधक अविनाश प्रसाद उपस्थित रहे। वेकोलि द्वारा वैज्ञानिक खदान बंदी (साइंटिफिक माइन क्लोजर) के क्षेत्र में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कंपनी की 116 खदानों के लिए माइन क्लोजर प्लान स्वीकृत किया गया हैं। अब तक 6 खदानों को कोयला मंत्रालय के नियमों के पूर्ण अनुसरण के साथ सफलतापूर्वक वैज्ञानिक ढंग से बंद किया जा चुका है। साथ ही खनन क्षेत्रों में जैविक पुनर्वास (बायोलॉजिकल रिक्लेमेशन) के तहत स्थापना से अब तक 2 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।

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