सोनभद्र। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जिला कलेक्टर कार्यालय बुधवार को पर प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा। रसोइयों ने न्यूनतम मानदेय में वृद्धि, स्थायीकरण और अन्य कल्याणकारी योजनाओं को शीघ्र लागू करने की मांग की। माध्यमिक भारतीय रसोईया वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने बताया कि वर्ष 2004 से न्यूनतम मानदेय के अंतर बकाया का भुगतान नहीं हुआ है। संगठन ने रसोइयों से 11 माह के बजाय पूरे 12 माह कार्य लेने और तदनुसार मानदेय देने की मांग की है।

प्रदर्शनकारी रसोइयों का कहना है कि वे प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत बहुत कम मानदेय पर काम कर रहे हैं, जिससे उनका जीविकोपार्जन मुश्किल हो गया है। इतने कम मानदेय में परिवार का भरण-पोषण करना कठिन है। ज्ञापन में रसोइयों के स्वतः नवीनीकरण, प्रस्तावित प्रतिबंधों को समाप्त करने, मातृत्व अवकाश, मेडिकल सुविधा और 14 आकस्मिक अवकाश प्रदान करने की भी मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, मृतक रसोइयों के स्थान पर उनके परिवार के सदस्य को नियुक्ति तथा न्याय पंचायत स्तर पर स्थानांतरण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
एसोसिएशन के संस्थापक संरक्षक तईयब अंसारी ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि 2026-27 के बजट में रसोइयों के लिए न्यूनतम मानदेय की घोषणा की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर मानवीय दृष्टिकोण नहीं अपनाती और भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानदेय प्रदान नहीं करती, तो संगठन देशव्यापी आंदोलन और हड़ताल करने को बाध्य होगा। अंसारी ने यह भी उल्लेख किया कि आशा, आंगनबाड़ी, बेसिक और शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने की चर्चाएं सामने आई हैं, लेकिन रसोइयों के मानदेय वृद्धि पर कोई बात नहीं हुई। हालांकि, संगठन ने शासन द्वारा समय-समय पर जारी आदेशों और कैशलेस सुविधा के प्रयासों के लिए सरकार का आभार भी व्यक्त किया।

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