कोल इंडिया की हाई पावर कमेटी का दो दिवसीय एनसीएल दौरा सम्पन्न

बीना, अमलोरी एवं निगाही परियोजनाओं का किया निरीक्षण,

NTPC

संविदा कर्मियों के वेतन, सामाजिक सुरक्षा एवं कार्य-परिस्थितियों की हुई समीक्षा

सोनभद्र, सिंगरौली।  संविदा कर्मियों के वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी के उद्देश्य से गठित कोल इंडिया की हाई पावर कमेटी ने एनसीएल की बीना,अमलोरी एवं निगाही परियोजनाओं का दौरा किया। इस दौरान समिति के सदस्यों में केशव राव, निदेशक (मानव संसाधन)-एमएसीएल, मनीष कुमार, निदेशक (मानव संसाधन)-एनसीएल, मु.अंजार आलम, निदेशक (वित्त), ईसीएल, सी.एस. तिवारी, निदेशक (तकनीकी), सीसीएल,  गौतम बनर्जी, कार्यकारी निदेशक (एचआर), सीआईएल, जयब्रत मजूमदार, महाप्रबंधक (सीएमसी), सीआईएल, रंजन बेहरा (बीएमएस),  शिवकांत पांडे (एचएमएस), नरेश मंडल (एटक),  मानस चटर्जी (सीटू) उपस्थित रहे।
साथ ही इस अवसर पर महाप्रबंधक (अमलोरी क्षेत्र) आलोक कुमार, महाप्रबंधक(बीना क्षेत्र)  आर के सिंह, महाप्रबंधक (निगाही क्षेत्र)  राजेंद्र वर्मा, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) समीर बरला, उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन) राजेश चौधरी, अमलोरी, बीना व निगाही परियोजनाओं के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे ।

हाई पावर कमेटी ने मंगलवार को बीना व अमलोरी परियोजना का दौरा किया व बुधवार को निगाही परियोजना का दौरा किया। इस अवसर पर खदानो का निरीक्षण किया साथ ही संविदा श्रमिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं जैसे कैंप, रेस्ट शेल्टर, कैंटीन आदि का जायजा लिया गया। सदस्यों ने संविदा कर्मियों से संबंधित वेतन भुगतान, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली, स्वास्थ्य  व अन्य लाभों की विस्तार से समीक्षा की। समिति ने संविदा श्रमिक शिविरों में विभिन्न वैधानिक दस्तावेजों की जांच भी की व एनसीएल की कार्य संस्कृति व संविदा कर्मियों को दी जाने वाली सुविधाओं की सराहना की। समिति के सदस्यों ने परियोजना में अधिभार हटाव में कार्यरत संविदा श्रमिकों से संवाद कर उनकी कार्य-परिस्थितियों, सुरक्षा एवं कल्याण से जुड़े मुद्दों पर फीडबैक लिया। इस अवसर पर बीना परियोजना में उत्कृष्ट कार्य करने वाले श्रमिकों को सम्मानित भी किया गया। समिति के सदस्यों ने निगाही में ड्रैगलाइन संचालन व सतत खनन पहल के तहत विकसित बरेजा इको-पार्क भी देखा।
गौरतलब है कि यह संयुक्त समिति एनसीएल के दो दिवसीय दौरे थी जो संविदा श्रमिकों के जीवन स्तर, कार्य-परिस्थितियों एवं सामाजिक सुरक्षा के उन्नयन हेतु समग्र मूल्यांकन कर अपने सुझाव देती है, जिससे भविष्य में संविदा कर्मियों के हित में और अधिक प्रभावी नीतिगत सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।

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