मुझको अबला मत समझो मैं झांसी वाली रानी हूं – कौशल्या कुमारी चौहान

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– नव वर्ष काव्य संध्या पर हुआ अभिनंदन कार्यक्रम

सोनभद्र। शहीद स्थल करारी, सोन संगीत फाउंडेशन, व साहित्य दीप संस्थान के तत्वावधान में समाजसेवी कमलेश खांबे के आवास पर शनिवार शाम को काव्य संध्या नव वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित की गई। अध्यक्षता गीतकार ईश्वर विरागी ने किया संचालन दिलीप सिंह दीपक ने किया। वाणी वंदना करते हुए दयानंद दयालू ने  , बिगरी बनावा जगजननी से शुरुआत किया। प्रदुम्न त्रिपाठी ने, सर्वे भवन्तु सुखिनः मंगल हमारी भावना हो, प्रीत की गंग ओ जमन बहती रहे यह कामना हो सुनाकर समरसता लोक कल्याण का भाव जगाया। 

शायर अशोक तिवारी ने, हमने तुमसे प्यार किया और क्या किया, यूँ जिंदगी गुजार दिया और क्या किया सुनाकर वाहवाही लूटी। कवि धर्मेश चौहान ने, बड़ा ही सुंदर बड़ा ही प्यारा अपना हिंदुस्तान, सुनाकर राष्ट्र आराधना किये सराहे गये। सुनिल चौचक ने हास्य की रचना सुनाकर लोगों को गुदगुदाया। दिलीप सिंह दीपक ने बुजुर्गों ने लहू देकर रखी है आबरू इसकी, तुम सब कुछ बेच दो लेकिन हिंदुस्तान मत बेचो सुनाकर नसीहत दी। कौशल्या कुमारी चौहान ने देश भक्ति व नारी सशक्तिकरण पर गंभीर रचना मुझको अबला मत समझो मैं झांसी वाली रानी हूँ सुनाकर वीर रस से वातावरण सृजित किया।समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कमलेश खांबे को अंगवस्त्र लेखनी पुस्तिका अभिनंदन पत्र देकर सम्मानित किया गया। सुशील मिश्रा ने सस्वर संगीत प्रस्तुति देवी गीत गाकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। अंत में अध्यक्षता करते हुए गीतकार ईश्वर विरागी ने कालजयी रचना थाम लेंगे वक्त को चलने न देंगे सुनाकर पूर्णता प्रदान किये। आगामी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बार सभागार में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कराने व सुकवि कमलेश मिश्र राजहंस का नागरिक अभिनन्दन के प्रस्ताव अनुमोदन के साथ आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर जयशंकर त्रिपाठी, देवानंद पांडेय, ठाकुर कुशवाहा, ऋषभ आदि लोग मौजूद रहे।

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