वाराणसी! सभ्यता, संस्कृति और मानवीय सरोकारों की अनूठी धरती। शनिवार की उसी पूज्य रात में, जब काशी की हवाओं में गंगा की शीतलता और मंदिरों की घंटियों में आशिष बसता है, एक ऐसा विवाह सम्पन्न हुआ जिसने पूरी नगरी को भावुक कर दिया और समाज को एक नई दिशा दिखाई।*
*वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक विजय विनीत के पुत्र विकास सिंह—जो देश की एक प्रतिष्ठित कंपनी में एसोसिएट मैनेजर (HR) के पद पर कार्यरत हैं—का विवाह पांडेपुर के पंचकोशी रोड स्थित अशोक उपवन में नीतू सिंह के साथ सम्पन्न हुआ। नीतू स्वयं एक सुसंस्कृत, आत्मनिर्भर और संवेदनशील युवती हैं, जो नवोदय विद्यालय में साइकोलॉजिस्ट के पद पर तैनात हैं।*
*इन दोनों का मिलन अपने आप में विचारों का संगम था! दो शिक्षित, जागरूक और मन से परिपक्व व्यक्तित्वों का ऐसा संयोग, जिसने विवाह को केवल एक रस्म न रहने देकर एक सामाजिक संदेश बना दिया।*
*इस विवाह की सबसे विशेष बात यह रही कि यह पूरी तरह बिना दहेज सम्पन्न हुआ। विजय विनीत ने अत्यंत स्पष्ट और दृढ़ स्वर में कन्या पक्ष द्वारा किसी भी प्रकार के दहेज को स्वीकार करने से इंकार कर दिया। उनका यह निर्णय केवल एक औपचारिक घोषणा नहीं था, बल्कि एक साहसिक प्रतीक-एक सामाजिक प्रतिरोध—जो उस पुरानी सोच के विरुद्ध खड़ा है, जिसने वर्षों से रिश्तों की पवित्रता पर सवाल खड़े किए हैं।*

*अशोक उपवन में उमड़ी भीड़ किसी उत्सव का ही रूप थी—बनारस के नागरिक, पत्रकार, लेखक, राजनीतिकजन, और अनेक शुभचिंतक… सभी के चेहरे पर संतोष की मुस्कान और हृदय में शुभकामनाओं की गूंज थी।हर कोई इस बात से अभिभूत था कि आज की भाग-दौड़ और दिखावे वाली दुनिया में भी ऐसे विवाह होते हैं, जहाँ सादगी में ही सौंदर्य और सिद्धांतों में ही गरिमा बसती है।*
*विकास और नीतू, अपने-अपने पेशे में स्थापित दो सशक्त व्यक्तित्व-जब परिणय सूत्र में बंधे, तो यह केवल दो लोगों का मिलन नहीं था…यह समानता का, आत्मनिर्भरता का और नई सामाजिक चेतना का उत्सव था।विवाह से दो दिन पहले हल्दी,मेहंदी और संगीत का कार्यक्रम चंद्रकांता के देश नवगढ़ इलाके के राजदारी रिसोर्ट में संपन्न हुआ था!*
*बनारस की मिट्टी ने इस मिलन को एक आशीर्वाद की तरह ग्रहण किया। हर दुआ में यही स्वर था कि यह जोड़ा जीवन की हर राह पर एक-दूसरे का साथ उसी गरिमा, विश्वास और समझ के साथ निभाएगा, जैसा उनके विवाह ने समाज को दिखाया है।*
*विजय विनीत का दहेज को ठुकराना सिर्फ उनका निजी फैसला नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमिट संदेश है-रिश्तों की कीमत प्यार और सम्मान से तय होती है!*

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