हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एपीसीपीएल झज्जर का महत्वपूर्ण कदम

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बायोमास बिजनेस पार्टनर्स मीट का सफल आयोजन, स्वच्छ पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई

झज्जर।अरावली पावर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (एपीसीपीएल), झज्जर द्वारा 11 जून 2026 को “बायोमास बिजनेस पार्टनर्स मीट” का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम देश में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा प्रदूषण कम करने के राष्ट्रीय प्रयासों के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बायोमास आपूर्ति से जुड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना, उनके सुझाव प्राप्त करना तथा बायोमास आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाना था।

इस अवसर पर 22 बायोमास विक्रेताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में एपीसीपीएल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी,  दिलीप कैबोर्त्ता, महाप्रबंधक (ओएस)  कैलाश प्रसाद सतपथी, महाप्रबंधक (ओ एंड एम)  जयोतोष कुमार डे तथा महाप्रबंधक (ओ एंड एफएम)  मोहम्मद निजामुद्दीन सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने उपस्थित होकर प्रतिभागियों को संबोधित किया।

इसके अतिरिक्त एपीसीपीएल के मुख्य वित्तीय अधिकारी  अरुण कुमार, अपर महाप्रबंधक (मेंटेनेंस) श्री अतुल अग्रवाल तथा सभी विभागाध्यक्ष भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उनकी उपस्थिति ने बायोमास आधारित हरित ऊर्जा पहल को सफल बनाने और साझेदारों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाया।

कार्यक्रम की शुरुआत अपर महाप्रबंधक (एफएम)  जसमेर सिंह के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कहा कि एपीसीपीएल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बायोमास सह-दहन (को-फायरिंग) के प्रतिशत के आधार पर एपीसीपीएल झज्जर ने पूरे देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि कंपनी की पर्यावरण संरक्षण के प्रति गंभीरता और समर्पण का प्रमाण है।

अपर महाप्रबंधक (एफएम)  अमित के. गौतम ने एक विस्तृत प्रस्तुति के माध्यम से बायोमास क्षेत्र में प्राप्त महत्वपूर्ण उपलब्धियों और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बायोमास पेलेट के भुगतान चक्र को 42 दिनों से घटाकर मात्र 15 दिन कर दिया गया है, जिससे व्यापारिक साझेदारों को बड़ी सुविधा मिली है। साथ ही पेलेट की गुणवत्ता में सुधार करते हुए उसका आकार 25 मिमी से घटाकर 10 मिमी से कम किया गया है, जिससे अनावश्यक पदार्थों की मात्रा कम हुई है तथा ईंधन की ऊर्जा क्षमता में वृद्धि हुई है।

उन्होंने आगामी मानसून के दौरान बायोमास सामग्री को निर्माण और परिवहन के समय वर्षा से सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक सावधानियों की भी जानकारी दी, ताकि सामग्री की गुणवत्ता बनी रहे और ऊर्जा उत्पादन प्रभावित न हो।

कार्यक्रम के दौरान एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर एवं सुझाव सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें बायोमास विक्रेताओं ने अपने विचार, अनुभव और सुझाव साझा किए। अधिकारियों ने उनकी सभी जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा प्राप्त सुझावों को भविष्य की कार्ययोजनाओं में शामिल करने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन एपीसीपीएल और उसके बायोमास साझेदारों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने में सफल रहा। साथ ही इसने स्वच्छ ऊर्जा, प्रदूषण में कमी और पर्यावरण संरक्षण के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित किया।

बायोमास आधारित ऊर्जा उत्पादन न केवल कृषि अवशेषों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देता है, बल्कि खुले में पराली और अन्य अवशेष जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को भी कम करता है। एपीसीपीएल की यह पहल स्वच्छ भारत, हरित भारत और सतत विकास के राष्ट्रीय संकल्प को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

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