म्योरपुर, सोनभद्र। स्थानीय ब्लॉक के बभनडीहा सामुदायिक भवन परिसर में मंगलवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार एवं बीएचयू वाराणसी के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामस्वरूप मीणा के निर्देशन में किसानों और समूह की महिलाओं को फसलों में नई तकनीक एवं नवाचार विधियों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ परिवार के जीवन स्तर में सुधार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना रहा।
कृषि विशेषज्ञ रामकुमार ने किसानों को धान में खैरा रोग के उपचार के लिए जिंक सल्फेट तथा तिलहन फसलों में तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर के फोलियर छिड़काव की विधि बताई। उन्होंने कहा कि धान की रोपाई के 21 से 45 दिन के बीच खैरा रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार जिंक सल्फेट का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं तिलहन फसलों में सल्फर के प्रयोग से तेल की मात्रा और फसल की गुणवत्ता में लाभ मिल सकता है।
उन्होंने छिड़काव के उचित समय, मात्रा और सावधानियों की जानकारी देते हुए कहा कि सल्फर का छिड़काव मौसम साफ रहने पर करना चाहिए और छिड़काव के बाद कम से कम चार घंटे तक बारिश की संभावना नहीं होनी चाहिए। प्रशिक्षण में खरपतवार नियंत्रण, विभिन्न रोगों के लक्षण, उनके उपचार तथा रासायनिक दवाओं के उपयोग से होने वाले लाभ-हानि की भी जानकारी दी गई।
कृषि विशेषज्ञ ने किसानों को सलाह दी कि बिना जानकारी के किसी भी खरपतवारनाशी या कृषि रसायन का प्रयोग न करें। फसल और रोग के अनुसार कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही दवाओं का प्रयोग करें।कार्यक्रम में फील्ड वर्कर रामाशंकर, ग्राम प्रधान संत कुमार, डॉ. भोला सिंह सहित किसान महिपत सिंह, रामसिंह, रामसरन, लालचंद, रामप्यारे, शांति देवी, राजकुमारी समेत बड़ी संख्या में किसान और समूह की महिलाएं मौजूद रहीं।
धान में जिंक सल्फेट और तिलहन में सल्फर के छिड़काव का प्रशिक्षण
