धनबाद। बीसीसीएल द्वारा कल्याण भवन (एचआरडी) में आज ‘मानव व्यवहार एवं मनोवैज्ञानिक समस्याएं’ (ह्यूमन बिहेवियर एंड साइकोलॉजिकल इश्यूज़) विषय पर एक-दिवसीय उन्मुखीकरण-सह-प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मियों को विभिन्न व्यवहारगत एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं के प्रति सजग करने के साथ कार्यस्थल पर सकारात्मक एवं संतुलित कार्य-संस्कृति को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया ने की। इस अवसर पर महाप्रबंधक (एचआरडी) सुधाकर प्रसाद, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) कुमार मनोज, विभागाध्यक्ष (सीएसआर/औद्योगिक संबंध) सुरेन्द्र भूषण, सीएमओ (सीएचडी) डॉ. बंदना सहित मानव संसाधन निदेशालय के अंतर्गत कोयला भवन मुख्यालय के महाप्रबंधकगण/विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय प्रबंधक (मानव संसाधन) तथा अन्य अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशेष वक्ता एवं प्रशिक्षक के रूप में गुरुग्राम के प्रसिद्द मनोचिकित्सक, डॉ. सागर कश्यप ने सहभागिता की। उन्होंने विषय पर प्रतिभागियों को विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान किया तथा मानसिक स्वास्थ्य, व्यवहारगत संतुलन तथा कार्यस्थल पर मनोवैज्ञानिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने आदि अन्य विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों के औपचारिक स्वागत, सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन तथा कोल इंडिया गीत के साथ की गई। महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) श्री सुधाकर प्रसाद ने निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया एवं डॉ. सागर कश्यप का शॉल, श्रीफल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर पारंपरिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया ने कहा कि सुरक्षित एवं प्रभावी कार्य निष्पादन के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी समान रूप से ध्यान रखना आवश्यक है। विशेष रूप से खनन जैसे चुनौतीपूर्ण कार्यक्षेत्र में प्रत्येक कर्मी का सतर्क, सजग एवं शारीरिक-मानसिक रूप से संतुलित रहना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यह संतुलन न केवल व्यक्तिगत कार्यक्षमता और निर्णय क्षमता को बेहतर करता है, बल्कि संगठन की उत्पादकता, कार्य संस्कृति एवं सुरक्षा मानकों को भी सुदृढ़ बनाने में सहायक होता है।
प्रशिक्षण सत्र में डॉ. सागर कश्यप ने पॉवरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से प्रतिभागियों को मानव व्यवहार एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने स्ट्रेस एवं प्रेशर की परिभाषा एवं अंतर, इससे उबरने के उपाय, व्यवहारगत समस्याएँ, कार्य-स्वास्थ्य संतुलन, विचार प्रक्रिया में ग्रंथियों की भूमिका, न्यूरॉन्स की कार्यप्रणाली, शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले रासायनिक तत्व एवं औषधियाँ, बायोलॉजिकल स्ट्रेस, पोषण संबंधी कमियाँ, नेचुरल क्लेंज़र, बूस्टर एवं रिवर्सल जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य में असंतुलन अथवा कमी का प्रत्यक्ष प्रभाव व्यक्ति की कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता एवं उत्पादकता पर पड़ता है, जिससे उसकी दैनिक दिनचर्या, व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक जीवन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों को मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य से संबंधित प्रारंभिक संकेतों के प्रति सजग रहने तथा समय रहते चिकित्सकीय परामर्श एवं उपचार इत्यादि के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान डॉ. कश्यप ने 25 प्रश्नों पर आधारित एक साइकोमेट्रिक टेस्ट भी आयोजित किया, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य में संभावित कमी अथवा असंतुलन का प्रारंभिक आकलन करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस गतिविधि में उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समापन सत्र में महाप्रबंधक (एचआरडी) सुधाकर प्रसाद ने डॉ. कश्यप को स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का समापन महाप्रबंधक (एचआरडी) सुधाकर प्रसाद द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
