प्रयागराज। उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मंडल के चुनार जंक्शन रेलवे स्टेशन पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 11वीं बटालियन एवं रेलवे द्वारा फुल स्केल संयुक्त मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस संयुक्त मॉक ड्रिल में रेलवे के विभिन्न विभागों की टीमें, सिविल डिफेंस, स्काउट एवं गाइड, एआरटी/प्रयागराज, एसपीएआरएमवी/प्रयागराज तथा मेडिकल टीम के साथ चुनार के जिला प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन एवं चिकित्सा विभाग ने समन्वित रूप से भाग लिया।

संयुक्त मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपातकालीन परिस्थितियों में रेलवे की आपदा प्रबंधन टीम, एनडीआरएफ एवं जिला प्रशासन द्वारा त्वरित और समन्वित कार्रवाई करते हुए अधिक से अधिक लोगों की जान बचाना तथा जन-धन की क्षति को न्यूनतम करना है। इस फुल स्केल संयुक्त मॉक ड्रिल में अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन), एम. एम. वारिस, उप मुख्य संरक्षा अधिकारी/उत्तर मध्य रेलवे, ओ. पी. सिंह; वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी, यू. सी. शुक्ला तथा सहायक कमांडेंट/एनडीआरएफ, आशीष चौहान उपस्थित रहे।
संयुक्त मॉक ड्रिल के दौरान गाड़ी संख्या 00123 दीनदयाल उपाध्याय नगर-प्रयागराज पैसेंजर के अवपथन तथा कोच संख्या एस-1 में आग लगने की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। इस दौरान ट्रेन मैनेजर एवं लोको पायलट द्वारा स्टेशन अधीक्षक/चुनार जंक्शन सहित संबंधित अधिकारियों एवं कंट्रोल को सूचना दी गई। आग लगने की सूचना मिलते ही रेलवे, अग्निशमन, पुलिस प्रशासन एवं चिकित्सा विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। रेलवे एवं अग्निशमन कर्मियों ने संयुक्त प्रयास से आग पर तत्काल काबू पाया।
एनडीआरएफ की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोच की खिड़की एवं छत को काटकर प्रवेश मार्ग बनाया और रोपवे की सहायता से घायल एवं बेहोश यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें एसपीएआरएमवी/प्रयागराज की मेडिकल टीम को सौंपा गया। घायलों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई गई तथा गंभीर रूप से घायल यात्रियों को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजने का अभ्यास किया गया। संयुक्त मॉक ड्रिल में दुर्घटना के समय टिकट निरीक्षक, ट्रेन मैनेजर, लोको पायलट एवं सहायक लोको पायलट, कोच अटेंडेंट, मैकेनिक, स्टेशन स्टाफ तथा अन्य रेल कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली त्वरित कार्रवाई का भी अभ्यास किया गया। इस दौरान विभिन्न विभागों के बीच सूचना के आदान-प्रदान, राहत एवं बचाव कार्यों तथा आपातकालीन संसाधनों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया गया।
इस संयुक्त मॉक ड्रिल में एनडीआरएफ/वाराणसी की टीम का नेतृत्व सहायक कमांडेंट/एनडीआरएफ,आशीष चौहान ने किया। एनडीआरएफ की टीम के 37 कर्मियों ने भाग लिया। टीम के सदस्यों ने रेल दुर्घटना जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों का प्रभावी प्रदर्शन किया। इस दौरान रेलवे एवं जिला प्रशासन की टीमों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला।
संयुक्त मॉक ड्रिल के उपरांत अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन), एम. एम. वारिस ने कहा कि इस संयुक्त अभ्यास से प्राप्त अनुभव के आधार पर आपदा प्रबंधन की कार्यप्रणाली एवं तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। रेलवे, एनडीआरएफ एवं जिला प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया से आपातकालीन परिस्थितियों में जनहानि को न्यूनतम करने में सहायता मिलेगी।
वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी, यू. सी. शुक्ला ने कहा कि रेल संरक्षा एवं आपदा प्रबंधन की दृष्टि से इस प्रकार के संयुक्त अभ्यास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिनसे विभिन्न विभागों की तत्परता एवं कार्यक्षमता का आकलन किया जा सकता है। ऐसे अभ्यासों से प्राप्त अनुभव एवं सामने आने वाली कमियों के निराकरण से वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों में राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक त्वरित तथा प्रभावी बनाया जा सकेगा।
सहायक कमांडेंट/एनडीआरएफ, आशीष चौहान ने कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल से विभिन्न टीमों के बीच समन्वय, दक्षता एवं उपकरणों की कार्यक्षमता की जांच की जाती है। कोच में आपातकालीन स्थिति के दौरान निर्धारित स्थानों को काटकर प्रवेश किया जाता है तथा अभ्यास के दौरान सामने आने वाली कमियों को दूर किया जाता है। ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता एवं त्वरित कार्रवाई की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस प्रकार के अभ्यास कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए अधिक दक्ष बनाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के संयुक्त अभ्यास प्रत्येक जनपद में आयोजित किए जाने चाहिए, जिससे आपदा के समय त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।इस संयुक्त मॉक ड्रिल में रेलवे, एनडीआरएफ एवं सिविल प्रशासन के लगभग 200 अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
