‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से रेलवे परिसरों को हरित बनाने की पहल, दो करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ते कदम
प्रयागराज। रेलवे की पहचान अब केवल रेलगाड़ियों की रफ्तार, आधुनिक सुविधाओं और बेहतर यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी उसकी भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसी सोच को जमीन पर उतारते हुए उत्तर मध्य रेलवे ने महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व में पौधरोपण अभियान को व्यापक जनभागीदारी और संस्थागत प्रतिबद्धता का स्वरूप दिया है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत चालू वित्तीय वर्ष में 1,11,11,111 पौधे लगाने की उपलब्धि इसी प्रयास का उल्लेखनीय उदाहरण है।
इस उपलब्धि को केवल पौधों की संख्या के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह रेलवे परिसरों को अधिक हरा-भरा बनाने, पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सूबेदारगंज स्थित रेल गाँव में आयोजित कार्यक्रम में महाप्रबंधक श्री नरेश पाल सिंह ने प्रतीकात्मक रूप से 1,11,11,111वें पौधे का रोपण कर इस उपलब्धि को विशेष पहचान दी। इस अवसर पर मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी लीची, तुलसी और आम सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए।
लक्ष्य बड़ा, प्रयास व्यापक
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून को उत्तर मध्य रेलवे के अधिकार क्षेत्र में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान दो करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए महाप्रबंधक ने तीनों मंडलों को सक्रिय भागीदारी के निर्देश दिए। इसके बाद प्रयागराज, झाँसी और आगरा मंडलों में पौधरोपण के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास किए गए।
अब तक प्रयागराज मंडल 43.44 लाख पौधे लगाकर सबसे आगे है, जबकि झाँसी मंडल में 42.09 लाख और आगरा मंडल में 25.58 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है। तीनों मंडलों के इन प्रयासों ने उत्तर मध्य रेलवे को एक करोड़ से अधिक पौधे लगाने के महत्वपूर्ण पड़ाव तक पहुँचाया है।
रेलवे की खाली जमीन बनी हरियाली का आधार
इस अभियान की विशेषता यह है कि पौधरोपण को केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसके लिए रेलवे की उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने पर भी जोर दिया गया। अनुपयोगी भूमि को चिह्नित किया गया, रेल पटरियों के किनारे जमा कबाड़ को हटाने के प्रयास किए गए और अतिक्रमित भूमि को वापस प्राप्त करने की दिशा में कार्रवाई की गई। स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों और राज्य वन विभाग के सहयोग से भी अभियान को गति मिली।
अलीगढ़, आगरा, मथुरा, कानपुर, झाँसी, बांदा, मिर्जापुर और ग्वालियर जैसे शहरों में स्थित 300 से अधिक रेलवे स्टेशनों और कॉलोनियों में एक ही दिन में 13 लाख से अधिक पौधे लगाए गए। यह व्यापक स्तर पर संचालित अभियान की कार्ययोजना और विभिन्न इकाइयों के समन्वित प्रयासों को दर्शाता है।
पौधरोपण से आगे, संरक्षण की भी चुनौती
पर्यावरण संरक्षण में वास्तविक सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने और वृक्ष बनने तक उनकी देखभाल सुनिश्चित करने से मिलती है। रेलवे परिसरों में लगाए गए पौधे भविष्य में यात्रियों और रेलकर्मियों को छाया, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण उपलब्ध कराने में सहायक बन सकते हैं। इसके लिए नियमित देखभाल, पौधों की सुरक्षा और उनके जीवित रहने की निगरानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान का भावनात्मक संदेश भी इसी जिम्मेदारी से जुड़ता है। माँ के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना के साथ लगाया गया प्रत्येक पौधा प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का प्रतीक है। उत्तर मध्य रेलवे की यह पहल इसी संदेश को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ा रही है।
महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के नेतृत्व में एक करोड़ से अधिक पौधे लगाने की उपलब्धि के बाद अब उत्तर मध्य रेलवे का अगला लक्ष्य दो करोड़ पौधों के निर्धारित आंकड़े को प्राप्त करना है। यदि पौधरोपण के साथ उनके संरक्षण और नियमित देखभाल पर भी निरंतर ध्यान दिया जाता है, तो यह अभियान रेलवे परिसरों में हरियाली बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक स्थायी मिसाल बन सकता है।
