सोनभद्र। प्रदेश के अन्तिम छोर पर बसे अति पिछड़े जनपद सोनभद्र के किसानों की हालत बद से बदतर होती जा रही है, जहां योगी सरकार किसानों की आय लगातार बढ़ाने की बात करती है, वहीं जिले में बैठे अधिकारी स्वयं किसानों को लूटने हेतु अमादा है। लगभग पूरे जिले के क्रय केंद्रों की हालत लगभग यहीं है। जिसमें चतरा क्रय केंद्र की हालत सबसे गम्भीर है, यहां के केन्द्र प्रभारी अरुन कुमार शुक्ला द्वारा लगातार धान और गेहूं खरीद में अनियमितता की जा रही थी। धान खरीद में किसानों से अधिक व्यापारियों तथा मिलरों का धान 200-300 रुपए प्रति क्विंटल लेकर कागज पर चढ़ाया गया तथा जिन किसानों से खरीद की गई उनसे प्रति ट्राली बख्सिस के नाम पर 100-200 रुपए, झरना के नाम पर 300 रुपए, सुतली के लिए 200 रुपए तथा पल्लेदारी 25 रुपए प्रति क्विंटल ली गई थी।
गेहूं खरीद में इनके द्वारा जुट के बोरी में वजन 51.200-51.300 किग्रा कराया जा रहा था तथा प्लास्टिक के बोरी में 50.200-50.300 किग्रा कराया जा रहा था, साथ ही पल्लेदारी के नाम पर 30 रुपए प्रति क्विंटल वसूली की जा रही थी जो कि सरकारी रेट से 50 प्रतिशत अधिक लिया जा रहा था। जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायतकर्ता युवा राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश सचिव अभय पटेल के द्वारा मई माह में की गई थी, जो जिला खाद्य विपणन अधिकारी को निस्तारण हेतु मिला था, जिसका निस्तारण जिला खाद्य विपणन अधिकारी अनूप कुमार श्रीवास्तव द्वारा बिना शिकायतकर्ता से सम्पर्क किए तथा बिना स्थलीय निरीक्षण के सिर्फ और सिर्फ केन्द्र प्रभारी के फर्जी रिपोर्ट पर महीनों बाद कर दिया गया। जिसमें आधी अधूरी समस्या को दिखाया गया जबकि जो अहम समस्या थी उसे केन्द्र प्रभारी तथा जिला खाद्य विपणन अधिकारी सोनभद्र द्वारा छिपाने का काम किया गया, जिससे पूर्णतः स्पष्ट होता है कि इसमें केन्द्र प्रभारी तथा जिला खाद्य विपणन अधिकारी सोनभद्र की भूमिका संदिग्ध है। जिलाधिकारी महोदय मामले की स्वयं जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करें तथा किसानों से किए गए अवैध वसूली की भरपाई अधिकारियों के वेतन से करते हुए दोषियों को तत्काल निलंबित करें ताकि आम जनमानस में सरकार के प्रति व्याप्त नाराजगी को दूर किया जा सके। इन पर कार्रवाई नहीं होने से अधिकारी बेलगाम होते जा रहे हैं तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने हेतु अमादा हैं।
