राष्ट्र की आत्मा का शक्तिगीत “वन्दे मातरम्”- सतीश गुप्त   

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मनोज पाण्डेय 

प्रयागराज अंग्रेजों की प्रताड़ना से पीड़ित भारत के अन्नदाता , युवा , मातृशक्ति एवं सम्पूर्ण जनमानस की वेदना से द्रवित होकर स्वतंत्रता आन्दोलन की अग्नि में अपनी आहुति देने को तत्पर सेनानी ‘बंकिम चन्द्र चटर्जी’ ने हृदय के उद्गार को जब मातृभूमि को समर्पित किया तो सनातन धर्म प्रेरित “जननी जन्म भूमिश्च, स्वर्गादपि गरीयसी” की महती उत्कण्ठा शब्दों में लयबद्ध हुई जो *”वन्दे मातरम्”* में परिलक्षित हो गयी बंकिम चन्द्र चटर्जी की कालजयी रचना “आनन्द मठ” में कृति को आच्छादित करती हुई यह हृदयस्पर्शी रचना ने तत्कालीन समय को अपनी स्वतंत्रता की भावना को और सम्बल प्रदान किया जब 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में अंग्रेज हुकूमत के द्वारा गीत पर प्रतिबंध लगाने के कुचक्र के खिलाफ कवि रविन्द्र नाथ टैगोर ने अपनी वाणी के मधुर ध्वनि में लयबद्ध किया तो इस गीत ने जनमानस के हृदय पर मातृभूमि की स्वतंत्रता के दृढ़ निश्चय को और सशक्त कर दिया सन् 1905 में बंगाल के स्वदेशी आंदोलन ने “वंदे मातरम्” को राजनीतिक उद्घोष में तब्दील कर दिया प्रत्येक सभा में प्रारम्भ में यही गीत सभा को आंदोलन की शक्ति प्रदान करता रहा और “जनगणमन अधिनायक जय हे के उद्घोष से नयी ऊर्जा का संचार होता रहा “15 अगस्त 1947” की वह स्वतंत्र भारत की प्रथम सुहानी सुबह को 6 बजकर 30 मिनट पर जब आकाशवाणी की सुमधुर शुरुआत ने ओंकार नाथ ठाकुर की शास्त्रीय आवाज में जब “वन्दे मातरम्” का गीत पूरी तन्मयता , विनम्रता और स्टूडियो में खड़े होकर , दोनों हाथों को जोड़कर गाते हुये प्रसारित किया गया तो पूरे राष्ट्र ने उस गौरवपूर्ण क्षण को अपने हृदय की अनन्त गहराईयों में समेट लिया , जो आजतक प्रत्येक भारतीय के मनमस्तिष्क पर अविस्मरणीय छाप स्थापित कर गया भारत के प्रथम महामहिम राष्ट्रपति डाॅ राजेन्द्र प्रसाद जी की अध्यक्षता में जब “वन्देमातरम्” गीत “राष्ट्रगीत” के रुप में भारतीय संविधान ने 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के निर्णयोपरान्त अंगीकृत किया गया , पूरा राष्ट्र प्रसन्नता की अनन्त गहराईयों में गोते लगाने लगा आज भारत का सम्पूर्ण जनमानस “मातृभूमि” को समर्पित शक्ति की आराधना के इस पावन गीत को पूर्ण सम्मान के साथ गायन कर वन्दना करता है इस गीत की रचना के *150 वर्ष* पर भारत के प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कृतज्ञ राष्ट्र नें *”राष्ट्र गीत”* के पूरे देश में समूह गायन कर उत्सव मनाया इसकी यही अन्तर्राष्ट्रीय लोकप्रियता के कारण विश्व के 10 प्रमुख गीतों में “वन्दे मातरम्” को द्वितीय स्थान प्राप्त है संसद में नेशनल ऑनर ( अरेंजमेंट ) बिल ,2026 के पारित होने पर 11 अगस्त 2026 को राष्ट्रगीत को संवैधानिक मान्यता प्राप्तहुई और इसके अपमान पर सजा का प्रावधानभी सुनिश्चित है *”विद्या भारती द्वारा संचालित समस्त विद्यालयों में *”वन्दे मातरम्”* का समूहगान अपनी पूरी भव्यता,एकता,अखण्डता, और राष्ट्रीयता के सशक्त सन्देश को प्रस्तुत करेगा

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