अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन 150 शोध पत्रों का वाचन, एआई और मीडिया के भविष्य पर मंथन

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वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन एआई और मीडिया के बदलते स्वरूप पर व्यापक अकादमिक विमर्श हुआ। ‘एआई-संचालित मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र : पत्रकारिता, जनसंपर्क, विज्ञापन, डिजिटल संचार और सतत मीडिया का भविष्य’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी के विभिन्न समानांतर तकनीकी सत्रों में देश-विदेश से आए शोधार्थियों एवं विषय विशेषज्ञों ने कुल 150 शोध पत्रों की प्रस्तुति की गई।

सत्र के मुख्य वक्ता आईआईएमटी, भुवनेश्वर के निदेशक प्रो. श्रीकांत पटनायक ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव अब केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह दैनिक जीवन, नीति-निर्माण और विकास की प्रक्रियाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। 

प्रो. पटनायक ने कहा कि भाषाई सीमाओं को कम करने और सटीक अनुवाद को आसान बनाने में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 

विशिष्ट वक्ता प्रो. उमाशंकर पांडेय ने डिजिटल दौर में मीडिया शिक्षा और न्यूज़रूम की बदलती कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई आधारित उपकरणों ने सूचना के संकलन और वितरण की गति को काफी बढ़ा दिया है। ऐसे में पत्रकारों और मीडिया विद्यार्थियों के लिए तकनीकी दक्षता के साथ फैक्ट-चेकिंग और संपादकीय शुचिता को प्राथमिकता देना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।

नेपाल से आए वरिष्ठ पत्रकार एवं विशिष्ट अतिथि रितेश त्रिपाठी ने दक्षिण एशियाई मीडिया परिदृश्य में ए आई की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तकनीक भले ही सीमाओं के पार तेजी से विस्तार कर रही हो, लेकिन पत्रकारिता की मूल आत्मा मानवीय संवेदना, जमीनी रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़ी रहती है। 

अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन सचिव विभाग  उपाचार्य प्रोफेसर बाला लखेन्द्र ने बताया कि संगोष्ठी के तकनीकी सत्रों में पत्रकारिता, विज्ञापन, जनसंपर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव से जुड़े विभिन्न विषयों पर 150 से भी ज्यादा शोध प्रस्तुत किए गए। शोधार्थियों ने एआई के अवसरों के साथ-साथ उससे जुड़ी नैतिकता, विश्वसनीयता, तथ्य-जांच और मीडिया की बदलती कार्यप्रणाली पर भी अपने शोध निष्कर्ष साझा किए।

अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में सिंगापुर की जानी-मानी लेखिका डॉ नीतू गुजराल, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल के प्रोफेसर कुंदन आर्यल, त्रिनिटी यूनिवर्सिटी ऑफ़ एशिया फिलीपींस के प्रोफेसर वॉलटर हूयो यूडेलमो, अर्जेंटीना के प्रोफेसर फ्रांसिस्को विगलियरोलो,  यूथ एशिया नेपाल के अध्यक्ष डॉ संतोष शाह सहित अनेक अतिथि विद्वान भाग ले रहे हैं ।  कार्यक्रम में विभाग के प्राध्यापक, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संगोष्ठी का दूसरा दिन एआई और मीडिया के भविष्य को लेकर अकादमिक संवाद को नई दिशा देने वाला रहा।

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