मांग रहे बिजली मिल रहा मुकदमा, ग्रामीणों में आक्रोश……..

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बिजली विभाग के अधिकारी दें रहे फर्जी आश्वासन, जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग 

बिजली व्यवस्था ठीक नहीं हुई तो होगा बड़ा आन्दोलन, जनता के हक के लिए मुकदमा झेलने के लिए तैयार – समाजसेवी, महेंद्र सेठ 

बबुरी, चन्दौली। ( रोहित वर्मा ) बबुरी पावर क्षेत्र में लगातार बिगड़ती बिजली व्यवस्था अब दर्जनों  गांवों  के लिए गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। महीनों से जारी अघोषित बिजली कटौती, लो-वोल्टेज और हाई-वोल्टेज की समस्या ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। भीषण गर्मी के बीच ग्रामीणों को न दिन में राहत मिल रही है और न रात में चैन। लगातार शिकायतों और मांगों के बावजूद बिजली विभाग की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया, जिसके कारण क्षेत्रीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। कुछ दिन पूर्व क्षेत्र में अचानक हाई-वोल्टेज की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई, जिससे कई घरों के विद्युत उपकरण जल गए तथा लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। इस घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा और स्थानीय लोगों ने पावर हाउस पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन शुरू किया। यह धरना लगभग 48 घंटे तक चला, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि क्षेत्र में नियमित और समान रूप से बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा हाई-वोल्टेज और कटौती की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।

ग्रामीणों का आरोप है कि धरना समाप्त होने के बाद भी बिजली व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। उल्टा आंदोलन में शामिल महेंद्र सेठ उर्फ पप्पू सहित कई स्थानीय लोगों पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया। इस कार्रवाई से ग्रामीणों में भय और आक्रोश दोनों का माहौल है। स्थानीय जनता का कहना है कि अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठाना यदि अपराध माना जाएगा, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे। लोगों का आरोप है कि प्रशासन समस्याओं के समाधान की जगह आंदोलन करने वालों को दबाने का प्रयास कर रहा है।

क्षेत्रीय लोगों के अनुसार बिजली संकट का मुख्य कारण यह है कि एक निजी कंपनी को चौबीस घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जा रही है, जबकि आसपास के गांवों और मोहल्लों में घंटों बिजली काट दी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब एक निजी संस्था को लगातार बिजली मिल सकती है, तो आम जनता को मूलभूत सुविधा से क्यों वंचित रखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी आम जनता की समस्याओं की अनदेखी कर रहे हैं और केवल विशेष संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है। भीषण गर्मी और लगातार बिजली कटौती के कारण पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है। अधिकांश घरों में पानी की सप्लाई बिजली पर निर्भर है। बिजली न रहने के कारण मोटर और पंप नहीं चल पा रहे हैं, जिससे लोगों को पीने तक का पानी नहीं मिल पा रहा। महिलाएं और बुजुर्ग पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं। छोटे बच्चे, बीमार और बुजुर्ग इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार गर्मी और बिजली संकट के कारण अनेक लोग बीमार पड़ रहे हैं। कई बुजुर्गों और बच्चों की तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध न होने के कारण लोगों को दूर-दराज के अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह स्थिति और अधिक कठिन हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि बिजली व्यवस्था सुचारु हो जाए तो पानी, गर्मी और स्वास्थ्य से जुड़ी अधिकांश समस्याओं का समाधान स्वतः हो सकता है।

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारी पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। शिकायतों के बावजूद अधिकारी न तो क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं और न ही जनता से संवाद स्थापित कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है मानो विभाग “कुंभकरण की नींद” में सो रहा हो और जनता की परेशानियों से उसका कोई सरोकार न रह गया हो। कई बार शिकायत दर्ज कराने के बावजूद न तो ट्रांसफार्मर बदले गए, न लाइन की मरम्मत हुई और न ही कटौती की समस्या कम हुई।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो क्षेत्रीय जनता एक बार फिर बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। लोगों का कहना है कि यह लड़ाई किसी व्यक्तिगत स्वार्थ की नहीं, बल्कि जनता के मूल अधिकारों और जीवन की बुनियादी जरूरतों की है। यदि प्रशासन और बिजली विभाग समय रहते समाधान नहीं निकालते, तो आने वाले दिनों में जनआक्रोश और बढ़ सकता है। स्थानीय जनता ने जिला प्रशासन, विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया जाए। साथ ही आंदोलन में शामिल निर्दोष ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की मांग भी उठाई गई है। समाज सेवी महेंद्र सेठ ने 

कहा कि समस्याओं का समाधान बातचीत और जनहितकारी निर्णयों से होना चाहिए, न कि मुकदमे दर्ज कर लोगों की आवाज दबाकर। जनहित के लिए आवाज उठाता रहूंगा सरकार के दमनकारी रवैये से जनता डरने वाली नहीं है। बिजली आम आदमी की आवश्यकता है और उसका खर्च भी जनता उठा रही है। फिर जनता को भरपूर बिजली क्यों नहीं मिल रही है।

 क्षेत्रीय जनता ने जिलाधिकारी व उच्चाधिकारियों से अपील की है कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा को राजनीति और भेदभाव से ऊपर उठकर देखा जाए तथा आम नागरिकों को भी सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिया जाए। यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र की जनता लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखने को मजबूर होगी।

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