बोकारो । बीएसएल शीर्ष प्रबंधन एवं संयंत्र के विभिन्न श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में संयंत्र की वर्तमान प्रगति और आगामी परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।कार्यक्रम का शुभारंभ अधिशासी निदेशक (मानव संसाधन)राजश्री बनर्जी द्वारा स्वागत संबोधन से किया गया, जिसमें उन्होंने संयंत्र के लक्ष्यों की प्राप्ति में श्रमिकों के सामूहिक योगदान की सराहना की। इसके पश्चात निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन ने अपने संबोधन में गत वर्ष की उपलब्धियों, आगामी लक्ष्यों और आने वाली परियोजनाओं की जानकारी साझा करते हुए इस्पात उद्योग की वर्तमान चुनौतियों तथा बोकारो इस्पात संयंत्र की भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। बैठक के दौरान पीपीसी, प्रोजेक्ट्स एवं मानव संसाधन विभाग के प्रतिनिधियों द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया, जिसमें संयंत्र के परिचालन प्रदर्शन और विकासात्मक परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति साझा की गई।
बैठक में बोकारो स्टील वर्कर्स यूनियन (INTUC), बोकारो इस्पात कामगार यूनियन (AITUC), इस्पात मजदूर मोर्चा (CITU), क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ (HMS), बोकारो स्टील राष्ट्रीय मजदूर संघ (BMS), क्रांतिकारी इस्पात मजदूर संघ (SS) तथा जय झारखंड मजदूर समाज (JJMS) के पदाधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए। बैठक में उपस्थित वरीय अधिकारीयों ने श्रमिक प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा की।
निदेशक प्रभारी प्रिय रंजन ने बैठक के दौरान विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि संयंत्र की प्रगति में श्रमिकों की सक्रिय सहभागिता अहम है। उन्होंने रेखांकित किया कि निरंतर आपसी संवाद और समन्वय के माध्यम से ही बोकारो इस्पात संयंत्र में एक सुरक्षित, समृद्ध एवं उच्च उत्पादक कार्य-संस्कृति को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकता है।
बैठक का संचालन एवं समन्वय महाप्रबंधक (मानव संसाधन)प्रभाकर कुमार द्वारा किया गया। अंत में मुख्य महाप्रबंधक (मानव संसाधन)अंजनी कुमार शरण ने सभी उपस्थित अतिथियों एवं श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। यह बैठक प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच आपसी समन्वय को बढ़ावा देने की दिशा में बोकारो इस्पात संयंत्र की एक महत्वपूर्ण पहल है। नियमित रूप से आयोजित होने वाले ऐसे द्विपक्षीय संवाद न केवल कार्यस्थल पर सकारात्मक वातावरण निर्मित करते हैं, बल्कि संगठनात्मक प्रदर्शन को बेहतर बनाने के साथ-साथ एक सकारात्मक कार्य-संस्कृति को भी सुदृढ़ करते हैं।
