“शृंगार-ए-सिंगरौली” में गूंजा पर्यावरण का संदेश, एनटीपीसी विंध्याचल ने निभाई अग्रणी भूमिका

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सोनभद्र, सिंगरौली।  विश्व पर्यावरण दिवस पर सिंगरौली ने पर्यावरण प्रेम की अनूठी मिसाल पेश की। “शृंगार-ए-सिंगरौली” नामक रंगारंग आयोजन में जहां एक ओर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया, वहीं दूसरी ओर पर्यावरण संरक्षण का गंभीर संदेश भी समाज के हर वर्ग तक पहुंचा। यह खास आयोजन रेडियो ऊर्जा एफएम 89.6 द्वारा किया गया, जिसका मुख्य आयोजक था एनटीपीसी विंध्याचल।
इस वर्ष का थीम था – “सिंगरौली की आवाज़, पर्यावरण पर कुछ खास” । कार्यक्रम का आयोजन नवजीवन बिहार में स्थित सामुदायिक भवन में हुआ, जिसे आम नागरिकों, विशेषज्ञों और अधिकारियों की सहभागिता ने और भी खास बना दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एनटीपीसी विंध्याचल के मुख्य महाप्रबंधक(चिकित्सा) डॉ. बी.सी. चतुर्वेदी रहे, जिन्होंने अपने वक्तव्य में पर्यावरणीय चेतना और सामूहिक प्रयासों की महत्ता पर बल दिया। प्रस्तुत किए गए नुक्कड़ नाटक, चित्र प्रदर्शनी और ‘एक बाग हर घर’ जैसे नवाचारों ने हर दर्शक को प्रभावित किया।

पैनल चर्चा में पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। वीएसआर स्टेशनों के पर्यावरण पेशेवरों ने स्थायी विकास के अनुभव साझा किए। एनटीपीसी विंध्याचल, सिंगरौली और रिहंद से आए प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए स्थानीय स्तर पर टिकाऊ विकास की संभावनाओं पर चर्चा की।
इस अवसर पर एनटीपीसी विंध्याचल से राहुल वर्मा, अपर महाप्रबंधक (एयूडी),  शंकर सुब्रमणियम, उप प्रबंधक मानव संसाधन और  दिनेश कुमार मीना,कनिष्ठ अभियंता, ईएमजी) – उपस्थित रहे। वहीं एनटीपीसी सिंगरौली से  नीरज यादव, अपर महाप्रबंधक (ईएमजी) और श्रीमती दीपिका सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक (ईएमजी) मौजूद रहीं। एनटीपीसी रिहंद से राजीव कुमार मित्तल, अपर महाप्रबंधक(ईएमजी),  अमित धीमान, उप महाप्रबंधक(ईएमजी) और  राघवेंद्र नारायण, उप महाप्रबंधक (ईएमजी) ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में आर.एस. बघेल (प्रबंध निदेशक, बघेल इंफ्रास्ट्रक्चर) और डॉ. सुमित गुप्ता (अध्यक्ष, एसडीईसीसी) जैसे विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने समाज के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
एनटीपीसी का यह प्रयास यह दिखाता है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा भी समान रूप से आवश्यक है, और इस दिशा में हर छोटा कदम बड़ा परिवर्तन ला सकता है।

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