भारतीय शास्त्रीय कलाएं हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर – श्रीमती प्रज्ञा नायक, अध्यक्ष वनिता समाज

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कथक केवल नृत्य नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य, एकाग्रता एवं आत्म-अभिव्यक्ति की एक उत्कृष्ट साधना है – डॉ. रंजना उपाध्याय,बी.एच.यू.

एनटीपीसी सिंगरौली में सात दिवसीय कथक कार्यशाला का समापन, बालिकाओं ने दी शानदार प्रस्तुति

सोनभद्र। एनटीपीसी सिंगरौली के कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित बालिका सशक्तिकरण अभियान (GEM-2026) की बालिकाओं हेतु आयोजित सात दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला का समापन समारोह स्थानीय कर्मचारी विकास केंद्र स्थित सरस्वती सभागार में उत्साह एवं गरिमामय वातावरण के मध्य संपन्न हुआ।

यह कार्यशाला संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश के सहयोग से बिरजू महाराज कथक संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित की गई, जिसमें कथक प्रशिक्षक डॉ. रंजना उपाध्याय, सहायक आचार्या (कथक नृत्य), काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बी.एच.यू.) ने बालिका सशक्तिकरण अभियान की प्रतिभागी बालिकाओं को कथक नृत्य की विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण प्रदान किया। समापन समारोह में प्रतिभागी बालिकाओं ने कार्यशाला के दौरान अर्जित ज्ञान एवं कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपरा के अनुरूप नमस्कार मुद्रा, गुरु वंदना, तत्कार एवं नमन से हुआ। इसके पश्चात बालिकाओं ने “सरस्वती वंदना” के कवित्त बोलों पर सामूहिक कथक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अंतिम भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति बी.एच.यू. की शोध छात्राओं द्वारा दी गई, जिसने सभागार में उपस्थित सभी दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।

इस अवसर पर डॉ. रंजना उपाध्याय ने प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि कथक केवल नृत्य नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य, एकाग्रता एवं आत्म-अभिव्यक्ति की एक उत्कृष्ट साधना है। उन्होंने कहा कि इतनी अल्प अवधि में बालिकाओं द्वारा कथक की बारीकियों को सीखकर प्रस्तुत करना उनकी प्रतिभा, समर्पण एवं सीखने की उत्सुकता का परिचायक है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती प्रज्ञा नायक, अध्यक्ष वनिता समाज ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय शास्त्रीय कलाएं हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं। बालिकाओं को ऐसी कलाओं से जोड़ना उनके व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास वृद्धि एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने सभी प्रतिभागी बालिकाओं को बधाई देते हुए नियमित अभ्यास के माध्यम से अपनी प्रतिभा को और निखारने का आह्वान किया तथा डॉ. रंजना उपाध्याय एवं उनकी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. ओम प्रकाश, उप महाप्रबंधक (मानव संसाधन), एनटीपीसी सिंगरौली ने संस्कृति विभाग (उत्तर प्रदेश), बिरजू महाराज कथक संस्थान, वनिता समाज, शक्तिनगर तथा बालिका सशक्तिकरण अभियान से जुड़े शिक्षकों एवं सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति, कला और शास्त्रीय परंपराएं विश्व की प्राचीनतम एवं समृद्धतम धरोहरों में से हैं। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बालिकाओं में सांस्कृतिक चेतना, अनुशासन, सौंदर्यबोध एवं नैतिक मूल्यों का विकास होता है। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी सिंगरौली समाज में सकारात्मक परिवर्तन और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देने हेतु भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर करता रहेगा।

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