एनटीपीसी विंध्याचल में कोयला एवं राख परिवहन को लेकर रेलवे और वीएसआर स्टेशनों के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित

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सोनभद्र, सिंगरौली। एनटीपीसी विंध्याचल में दिनांक 26 सितंबर को कोयला एवं राख परिवहन से संबंधित प्रमुख मुद्दों तथा आवश्यक सहयोग पर चर्चा करने हेतु पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक डिम्पी गर्ग एवं वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों तथा वीएसआर क्षेत्र के स्टेशनों के प्रमुखों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में एनटीपीसी विंध्याचल के कार्यकारी निदेशक  किशोर कुमार होता, एनटीपीसी रिहंद के कार्यकारी निदेशक संजय असाटी तथा वीएसआर क्षेत्र के विभिन्न स्टेशनों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान रेलवे ने खदान स्तर पर कोयले की उपलब्धता के आधार पर बीओबीआर एवं बीओएक्सएन रेक उपलब्ध कराने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया, जिससे वीएसआर क्षेत्र में कोयले के स्टॉक को बढ़ाने में सहायता मिल सके। एनटीपीसी विंध्याचल की ओर से एमजीआर नीति के कार्यान्वयन के अंतर्गत तीन डीसीएच रेक को सर्किट में संचालित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। रेलवे ने इस प्रस्ताव को कॉरपोरेट स्तर पर आगे की चर्चा के लिए प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया।

राख परिवहन के विषय पर चर्चा करते हुए पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक डिम्पी गर्ग ने क्षेत्र में कोयला एवं राख के परिवहन को सुगम बनाने के लिए रेलवे की ओर से हरसंभव सहयोग देने तथा नई संभावनाओं को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने बीओएक्सएन रेक के माध्यम से फ्लाई ऐश की लोडिंग बढ़ाने पर जोर दिया तथा इस संबंध में उपलब्ध 40 प्रतिशत माल भाड़ा छूट को एक महत्वपूर्ण लाभ बताया। बैठक में गोरबी खदान मंब रेलवे के माध्यम से फ्लाई ऐश के बैकफिलिंग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। इस पहल को पर्यावरण की दृष्टि से लाभकारी बताते हुए रेलवे ने इसके कार्यान्वयन के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।
इस अवसर पर पूर्व मध्य रेलवे की ओर से सुश्री इंदु रानी दुबे (पीसीओएम), शैलेश वर्मा (पीसीई),  राजीव गुप्ता (सीएओ/सी/एस) तथा अखिलेश मिश्रा (डीआरएम/डीएचएन) उपस्थित रहे। बैठक में एनटीपीसी विंध्याचल के कार्यकारी निदेशक किशोर कुमार होता, एनटीपीसी रिहंद के कार्यकारी निदेशक संजय असाटी एवं वीएसआर क्षेत्र के विभिन्न स्टेशनों के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह बैठक कोयला एवं राख परिवहन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने, रेलवे एवं एनटीपीसी के बीच समन्वय सुदृढ़ करने तथा पर्यावरण अनुकूल राख प्रबंधन को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।

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