दुद्धी, सोनभद्र। इन दिनों दुद्धी तहसील का हाल बेहाल है। एक-एक लेखपाल के पास कई-कई गाँव हैं। आंकड़ों की बात करें तो दुद्धी तहसील में कुल 306 गाँव हैं जो महज 88 लेखपालों के भरोसे है। ऐसे में ग्रामीणों को ही लेखपालों की परिक्रमा करनी पड़ती है। आय जाति निवास के अलावा निस्तारण का भी लेखपालों पर बड़ा दबाव रहता है। इसके अलावा ग्रामीण पैमाइश के लिए कई कई दिन इंतजार करते रह जाते हैं जो आक्रोश का कारण बन जाता है।
स्थानीय लोगों और पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि तहसील में पहले से ही लेखपालों की भारी कमी थी। रही-सही कसर पिछले महीने में एक साथ 11 लेखपालों के स्थानांतरण ने पूरी कर दी। इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद क्षेत्र की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है। जिले के उच्चाधिकारियों द्वारा स्थानांतरण सूची जारी होने के बाद दुद्धी तहसील से 8 लेखपालों को कार्यमुक्त भी कर दिया गया लेकिन उनके स्थान पर लेखपालों की आवक कम होने के कारण अभी भी तीन लेखपालों को कार्यमुक्त नहीं किया जा सका है।
लेखपालों की इस कमी का सीधा असर आम जनता और खासकर छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है। वर्तमान में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी नौकरियों के आवेदन का दौर चल रहा है, जिसके लिए युवाओं को जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों की सख्त जरूरत है। लेखपालों की रिपोर्ट न लगने के कारण सैकड़ों आवेदन ऑनलाइन पोर्टल पर हफ्तों से लंबित पड़े हैं। इसके अतिरिक्त जमीनी विवादों के निपटारे, भूमि की पैमाइश (पत्थरगड़ी), वरासत दर्ज करने और अंश निर्धारण से जुड़े आवश्यक कार्य भी पूरी तरह ठप हैं।
