एमसीएल द्वारा इब वैली वॉशरी में 4,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले साइलो का शुभारंभ

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संबलपुर/ कोयला परिवहन व्यवस्था के आधुनिकीकरण, मशीनीकरण और सुदृढ़ीकरण की दिशा में महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में स्थित इब वैली कोयला खनन क्षेत्र के लखनपुर क्षेत्र में इब वैली कोयला वॉशरी में 4,000 मीट्रिक टन (MT) क्षमता वाले साइलो का शुभारंभ किया गया। यह साइलो एमसीएल की विस्तारित ‘फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी’ (FMC) और स्वचालित कोयला निकासी अवसंरचना को और मजबूत करेगा। यह आधुनिक कोयला प्रबंधन प्रणाली को रेल परिवहन से जोड़ते हुए वॉशरी से उपभोक्ताओं तक परिष्कृत कोयले के तेज और कुशल परिवहन को सुगम बनाएगा। इससे पारंपरिक कोयला प्रबंधन प्रणालियों पर निर्भरता भी कम होगी।

लखनपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक  ए.के. पांडे तथा भारतीय रेलवे के एरिया रेलवे मैनेजर  घनश्याम ने एमसीएल और भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में संयुक्त रूप से इस साइलो सुविधा का उद्घाटन किया।

कोयला निकासी प्रक्रिया को और अधिक सुगम एवं तेज बनाने के लिए एमसीएल लगातार आधुनिक मशीनीकरण को अपना रहा है तथा अत्याधुनिक एफएमसी और रेल अवसंरचना में निवेश कर रहा है। इस अत्याधुनिक साइलो के माध्यम से परिष्कृत कोयले का व्यवस्थित भंडारण तथा रेलवे रेक में तेज और स्वचालित लोडिंग संभव होगी। इससे परिवहन व्यवस्था सुचारु होने के साथ-साथ रेलवे रेक का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और उपभोक्ताओं तक कोयले की आपूर्ति अधिक कुशल एवं विश्वसनीय बनेगी। यह सुविधा एमसीएल और भारतीय रेलवे के बीच समन्वय को और मजबूत करेगी तथा निर्बाध कोयला परिवहन में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

10 मिलियन टन प्रति वर्ष (10 MTPA) क्षमता वाली इब वैली कोयला वॉशरी, कोल इंडिया की सबसे बड़ी नॉन-कोकिंग कोयला प्रसंस्करण इकाइयों में से एक है। 4,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले इस साइलो के जुड़ने से वॉशरी की कोयला प्रबंधन, भंडारण और रेल के माध्यम से प्रेषण संबंधी अवसंरचना और अधिक मजबूत हुई है। यह प्रौद्योगिकी-आधारित सुविधा अधिक कुशल और विश्वसनीय कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगी, जिससे उपभोक्ता संतुष्टि में वृद्धि होगी। साथ ही, यह एमसीएल के एकीकृत कोयला परिवहन दृष्टिकोण और देश के विद्युत एवं औद्योगिक क्षेत्रों को निर्बाध कोयला उपलब्ध कराकर घरेलू कोयला आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में उसके प्रयासों को दर्शाती है। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण के प्रति एमसीएल की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।

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