पिछले छह महीनों में 2.05 करोड़ अभिलेखों का डिजिटलीकरण, 15,730 वर्ग फुट कार्यालयीय स्थान हुआ मुक्त
उत्तर मध्य रेलवे को पूर्णतः पेपरलेस एवं हरित रेलवे बनाना हमारा लक्ष्य है” – महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह
प्रयागराज । डिजिटल इंडिया’ एवं ‘ग्रीन रेलवे’ की परिकल्पना को साकार करते हुए उत्तर मध्य रेलवे ने मात्र छह माह में व्यापक डिजिटलीकरण अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण किया है। इस ऐतिहासिक पहल के अंतर्गत उत्तर मध्य रेलवे के विभिन्न कार्यालयों के 2.05 करोड़ से अधिक अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया गया। इस अभियान के दौरान 2.21 करोड़ पृष्ठों तथा 4.6 मीट्रिक टन पुराने अभिलेखों का नियमानुसार निष्पादन (Weeding Out) किया गया, जिससे 15,730 वर्ग फुट से अधिक कार्यालयीय स्थान खाली हुआ। इस मुक्त हुए स्थान का उपयोग अब कर्मचारियों की सुविधाओं, बैठक कक्षों तथा अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों के लिए किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान 58 टीबी से अधिक सुरक्षित डिजिटल स्टोरेज क्षमता भी विकसित की गई। इस अभियान की नियमित निगरानी उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह द्वारा की गई, जबकि उप महाप्रबंधक अतुल मिश्रा ने उत्तर मध्य रेलवे के तीनों मंडलों में इस अभियान का समन्वय किया।
मंडलों एवं कारखानों का उत्कृष्ट प्रदर्शन*
उत्तर मध्य रेलवे की सभी इकाइयों ने इस अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया।
*प्रयागराज मंडल*
प्रयागराज मंडल ने 91.44 लाख अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया, 23.94 लाख पृष्ठों का निष्पादन किया, 3,609 वर्ग फुट स्थान एवं एक कक्ष को मुक्त कराया तथा 40.21 टीबी डिजिटल स्टोरेज क्षमता विकसित की।
*झांसी मंडल*
झांसी मंडल में 44.46 लाख अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया गया, 1.87 करोड़ पृष्ठों का निष्पादन किया गया तथा 10,621 वर्ग फुट स्थान एवं नौ कक्ष/हॉल मुक्त कराए गए। झांसी कारखाना ने 28.89 लाख अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर 1,000 वर्ग फुट स्थान मुक्त कराया, जबकि सीएमएलआर कार्यशाला ने 6 लाख अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर 500 वर्ग फुट स्थान मुक्त किया।
*आगरा मंडल*
आगरा मंडल ने 33.76 लाख अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया, 4.6 मीट्रिक टन अभिलेखों का निष्पादन किया तथा चार कक्ष मुक्त कराए।
*कागज की खपत में उल्लेखनीय कमी*
ई-ऑफिस एवं ई-फाइल प्रणाली के पूर्ण क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप उत्तर मध्य रेलवे में कागज की खपत में 39 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जहां औसतन प्रति माह 4,191 रीम कागज की खपत होती थी, वहीं चालू वित्तीय वर्ष में यह घटकर 2,548 रीम प्रति माह रह गई है।
इस 39 प्रतिशत कमी से प्रतिवर्ष लगभग 19,700 रीम कागज की बचत होने का अनुमान है, जिससे हर वर्ष लगभग 200 पेड़ों की कटाई रोकी जा सकेगी। यह उपलब्धि उत्तर मध्य रेलवे को हरित (ग्रीन) रेलवे बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अभियान पारदर्शिता, सुशासन एवं परिचालन दक्षता की दिशा में भी एक ऐतिहासिक पहल सिद्ध हुआ है। डिजिटलीकरण के माध्यम से रेलवे के कार्यों में पारदर्शिता, गति और कार्यकुशलता आई है। उत्तर मध्य रेलवे को 100 प्रतिशत पेपरलेस बनाने का लक्ष्य काफी हद तक प्राप्त कर लिया गया है। आगामी चरणों में छोटे स्टेशनों पर संरक्षित पुराने अभिलेखों का भी डिजिटलीकरण एवं निष्पादन किया जाएगा, जिससे अतिरिक्त स्थान उपलब्ध होगा और उसका उपयोग अन्य महत्वपूर्ण परिचालन गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा।
