सोन संगीत फाउंडेशन के तत्वावधान में उमामहेश्वर काव्य संध्या का हुआ भव्य आयोजन
सोनभद्र। सोन संगीत फाउंडेशन के तत्वावधान में पावस उमा माहेश्वर काव्य संध्या का आयोजन शनिवार को आयोजित हुआ। जिसमें एक से बढ़कर एक गीत सुनाया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अजय चतुर्वेदी कक्का ने किया। मुख्य अतिथि समाजसेवी सरदार कमलेश सिंह खांबे रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि कवि दिवाकर द्विवेदी मेघ रहे। वाणी वंदना पश्चात निदेशक शहीद स्थल प्रबंध समिति करारी प्रद्युम्न त्रिपाठी ने मीरा मोहन सी प्रीत लिख देना सबके अधरों पे गीत लिख देना, श्रृंगार की रचना सुनाकर वाहवाही लूटी। सुशील मिश्रा ने भोले बाबा को समर्पित पूर्वी सुनाकर ऊर्जा दिये। सुधाकर पांडेय स्वदेशप्रेम ने, जनाजा जब मेरा निकले वतन के वास्ते निकले सुनाया। कवयित्री कौशल्या कुमारी ने आपस में नफरत आपस में तकरार, मानव जीवन की है, सबसे बड़ी हार सुनाया। कवयित्री दिव्या राय ने, भर आती है आंख माँ की उदासी देखकर सुनाकर पीड़ा को स्वर दिया। दयानंद दयालू ने पावस को समर्पित कजली सुनाया। धर्मेश ने बड़ा ही सुंदर बड़ा ही मनहर अपना हिंदुस्तान सुनाया। अशोक तिवारी ने संचालन करते हुए, लानत है ऐसे रहनुमाओं पर जिसने लिया सिर्फ लिया दिया कुछ नहीं सुनाकर तंज कसा। अध्यक्षता करते अजय चतुर्वेदी कक्का ने अपनी रचना हुए स्वार्थ की बलि वेदिका पर देश को चढ़ने न देगें जाति धर्म मजहब में देश को बंटने न देगें सुनाकर राष्ट्र आराधना किये। विशिष्ट अतिथि दिवाकर दिवेदी मेघ ने, घुमंतू कुत्ता घर का न घाट का, जहाँ जो मिल जाय पत्तल वहीं चाटे सुनाकर देर तक हंसाते रहे। मुख्य अतिथि कमलेश खांबे ने देश की दशा, दिशा व समाज, घर, परिवार की संवेदना को बचाने की वकालत किये। विवेक चतुर्वेदी ने शायरी से शमा रौशन की। आभार अध्यक्ष सोन संगीत फाउंडेशन सुशील मिश्रा ने व्यक्त किया। इस अवसर पर जयशंकर त्रिपाठी, त्रिपुरारी मिश्रा, लालता प्रसाद मिश्र, ठाकुर कुशवाहा, फारुख अली आदि रहे।
