सोनभद्र में समर्सिबल पंप लेने गया मिस्त्री लाल अर्थी बनकर लौटा ……

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चकरघटृटा थाना क्षेत्र के शाहपुर निवासी मिश्रीलाल की वैनी मार्केट के पास हुई दुर्घटना में मौत 

10 माह पहले शुरू हुआ वैवाहिक जीवन, एक हादसे ने सब कुछ छीन लिया

एक आम सा दिन, रोज़मर्रा की जरूरत और घर–गृहस्थी के सपने… लेकिन सोनभद्र–बिहार मुख्य मार्ग पर  शाहपुर गांव के मिश्रीलाल का   सफर मंगलवार को आख़िरी बन गया।

 चंदौली / जिले के तहसील नौगढ़ में चकरघट्टा थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव निवासी मिश्रीलाल की वैनी क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना ने न सिर्फ एक युवक की जान ले ली, बल्कि एक नवविवाहिता का सुहाग, माता-पिता का सहारा और गांव का भरोसा भी छीन लिया। बताया जा रहा है कि मिश्रीलाल रामगढ़ (सोनभद्र) मार्केट से समर्सिबल पंप खरीदकर लौट रहा था। पंप को वैनी में एक रिश्तेदार के यहां रखकर वह बाइक से बिहार स्थित ससुराल जाने निकला ही था कि श्रीपालपुर के पास सुनसान सड़क पर उसकी बाइक एक महिला और बच्ची से टकरा गई। टक्कर के बाद बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे जा गिरी। हादसे में मिश्रीलाल, सरिता नामक महिला और आंचल नाम की बालिका गंभीर रूप से घायल हो गए। 

हादसे के वक्त सड़क लगभग खाली थी। घायल काफी देर तक मदद के इंतजार में पड़े रहे। कुछ देर बाद जब राहगीरों की नजर पड़ी, तब 112 पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और 108 एंबुलेंस की मदद से घायलों को वैनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद मिश्रीलाल और सरिता को जिला अस्पताल लोढ़ी रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान मिश्रीलाल की मौत हो गई। 

एक मोबाइल फोन की घंटी बजी, घर के लोग रोने लगे 

जैसे ही मौत की सूचना चकरघट्टा थाने से ग्राम प्रधान कृष्ण कुमार जायसवाल को दी गई, खबर आग की तरह  फैल गई। कुछ ही पलों में शाहपुर गांव की रौनक मातम में बदल गई। लोग यकीन नहीं कर पा रहे थे कि जो युवक सुबह काम से निकला था, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगा। सोनभद्र के  (लोढ़ी) जिला अस्पताल में जैसे ही परिजन पहुंचे, वहां का माहौल गमगीन हो गया। पिता सत्यनारायण, माता प्रभावती, पत्नी गीता और बहन फुलवारी शव से लिपटकर  बिलखते हुए पड़ीं। अस्पताल में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।

 10 माह पहले बिहार के डूमरकोन में हुई थी शादी 

मिश्रीलाल की शादी 10 माह पहले बिहार के डूमरकोन में हुई थी। नई शादी, नए सपने और नई जिम्मेदारियों के बीच उसकी असमय मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया। मिश्रीलाल घर का इकलौता सहारा था, जिसकी मेहनत से पूरा परिवार चलता था।‌

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