रामलीला भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है-आर पी सिंह

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रेनुसागर रामलीला में सती मोह, नंदी-रावण संवाद और श्रवण कुमार प्रसंग का भावपूर्ण मंचन

अनपरा, सोनभद्र। श्री रामलीला समिति रेनुसागर के तत्वावधान में 35 वां वर्ष आयोजित पारंपरिक रामलीला में सती मोह, नंदी-रावण संवाद, श्रवण कुमार प्रसंग तथा राक्षसों द्वारा नरसंहार की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय और प्रभावशाली संवादों के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत कर दिया। मंचन के दौरान उपस्थित दर्शक धार्मिक भावनाओं से ओतप्रोत नजर आए।कार्यक्रम का शुभारंभ हिंडालको रेनुसागर के यूनिट हेड आर.पी. सिंह सपत्नीक, दिशिता महिला मंडल रेनुसागर की वरिष्ठ सदस्या इंदू सिंह, हिंडालको रेनुसागर के हेड एचआर आशीष पांडेय सपत्नीक निशा पांडेय, कार्यक्रम संचालन हेड मनीष जैन सपत्नीक रीना जैन तथा संजय श्रीमाली सपत्नीक कविता श्रीमाली ने संयुक्त रूप से भगवान श्रीगणेश, भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती कर किया।

रामलीला के दौरान सती मोह प्रसंग में श्रद्धा, आस्था और भगवान की महिमा का सुंदर चित्रण देखने को मिला। वहीं नंदी-रावण संवाद के मंचन ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। श्रवण कुमार प्रसंग के माध्यम से माता-पिता के प्रति सेवा, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही राक्षसों द्वारा नरसंहार के दृश्य ने तत्कालीन परिस्थितियों और अधर्म के बढ़ते प्रभाव को मंच पर साकार किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि हिंडालको रेनुसागर के यूनिट हेड आर.पी. सिंह ने कहा कि रामलीला भारतीय संस्कृति एवं सनातन परंपरा की अमूल्य धरोहर है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को नैतिकता, मर्यादा, त्याग, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश देने वाला सशक्त माध्यम भी है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य के मार्ग पर चलने, बड़ों का सम्मान करने तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

हेड एच आर आशीष पांडेय ने सम्बोधन में कहा कि कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद अदायगी और भाव-भंगिमाओं से प्रत्येक प्रसंग को प्रभावशाली बनाया। रामलीला के माध्यम से दर्शकों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, पारिवारिक संस्कारों तथा धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष का संदेश मिला।इस अवसर पर ईआर हेड मृदुल भारद्वाज ,बृजेश बर्मा ,ललित खुराना ,विनोद केडिया, श्याम वियाला ,सदानन्द पांडेय सहित भारी संख्या में लीला प्रेमी मौजूद रहे।

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