ढुटेर में पीएम आवास की एससी सूची में अन्य जातियों का नाम शामिल होने से हड़कंप

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डीएम ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए दिया जांच का आदेश, पीडी ने गठित की टीम   

 सोनभद्र। सरकार की अति महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पात्रों को  पक्की छत मुहैया कराया जा रहा है ।वही घोरावल ब्लाक के ग्राम पंचायत ढुटेर में पीएम आवास योजना की अनुसूचित जाति श्रेणी की सूची में व्यापक पैमाने पर हेरा फेरी कर इनके हक पर डाका डालने की कोशिश की जा रही है। ढुटेर गांव निवासी राकेश, उपेंद्र, संदीप ,चंदन एवं बिजेंद्र ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंच जिलाधिकारी चर्चित गौड़ को शिकायती पत्र सौंप बताया कि एससी श्रेणी की सूची में अन्य जातियों के लोगों के नाम वरीयता क्रम में दर्ज कर दिए गए हैं ।इससे वास्तविक अनुसूचित जाति के पात्र लाभार्थियों को योजना के लाभ से वंचित होने की आशंका जताई जा रही है ।इस प्रकरण को डीएम ने गंभीरता से लेते हुए परियोजना निदेशक जिला विकास अभिकरण को इसकी तत्काल जांच कर  आवश्यक कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया ।इस पर पीडी ने फौरन सहायक विकास अधिकारी की अध्यक्षता में टीम गठित कराकर नियमानुसार कार्यवाही करते हुए एक सप्ताह के अंदर अवगत कराने के लिए खंड विकास अधिकारी घोरावल को निर्देश दिया। शिकायतकर्ताओं ने डीएम को दिए पत्रक में बताया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की अनुसूचित जाति की सूची में ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं जो इस श्रेणी में नहीं आते हैं ।ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित सूची का निष्पक्ष एवं अभिलेखीय सत्यापन कराया जाए और पात्रता की जांच के  पश्चात अनुसूचित जाति  की सूची में केवल वास्तविक पात्र (एससी) लाभार्थियों को ही शामिल किया जाए । ताकि एससी के भी गरीब तथा वंचित परिवारों को पक्की छत   मुहैया हो सके।

 पहले भी यहां उठ चुके हैं सवाल

ग्रामीणों ने दावा किया है कि  इससे पहले भी ग्राम पंचायत ढुटेर में अनुसूचित जाति के पात्र लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने में इसी तरह की समस्या सामने आई थी।   शिकायत के बाद जांच में जिम्मेदारों की गलती मिली थी  और कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन बाद में मामला आगे नहीं बढ़ सका। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार वे अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं और जरूरत पड़ने पर मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे।

 : *सूची में जाति का हेर फेर आखिर कैसे:* 

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि अनुसूचित जाति की सूची में पात्रता से इतर नाम दर्ज हुए हैं तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है और प्रक्रिया में यह स्थिति कैसे बनी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा अनियमितता प्रमाणित होने पर संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही पात्र लाभार्थियों के अधिकार भी सुरक्षित हो सकेंगे

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