सुंदरगढ़, । पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और हरियाली बढ़ाने की दिशा में एक अहम कोशिश के तौर पर, स्थानीय समुदायों, छात्रों और स्वयं-सहायता समूहों की भागीदारी के साथ ताराकसपुर के श्री लिंगेश्वर महादेव मंदिर परिसर में ज़िला-स्तरीय पर्यावरण जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान का मकसद एक हरा-भरा और प्लास्टिक-मुक्त समाज बनाना, पेड़-पौधे लगाने के लिए प्रोत्साहित करना, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना और समुदाय के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस कार्यक्रम में छात्रों और स्वयं-सहायता समूहों के सदस्यों समेत 1,000 से ज़्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।
इस कार्यक्रम में झारसुगुड़ा के ज़िला मजिस्ट्रेट कुणाल मोतीराम चव्हाण; डिप्टी ज़िला मजिस्ट्रेट सब्यसाची पांडा; राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी हिरण्य कुमार नाइक; ज़िला वन्यजीव संरक्षक और प्लांटेशन मॉनिटरिंग कमेटी के चेयरमैन प्रहलाद नायक; राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (झारसुगुड़ा ज़ोन) की पर्यावरण वैज्ञानिक श्रीमती अनुसूया एक्का; वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी; और एनटीपीसी दर्लीपाली के प्रोजेक्ट हेड फ़ैज़ तैयब समेत कई लोग शामिल हुए। अभियान के तहत, मंदिर परिसर में पौधे लगाए गए और लोगों व छात्रों के बीच अलग-अलग तरह के पौधे मुफ़्त बांटे गए। प्लास्टिक कम करने के संदेश को मज़बूत करने के लिए स्ट्रॉ (पुआल) से बने बैग बांटे गए और स्वयं-सहायता समूहों द्वारा पूरी तरह से प्लास्टिक-मुक्त फ़ूड स्टॉल चलाया गया। प्रतिभागियों ने पर्यावरण जागरूकता पर आधारित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किया।
कार्यक्रम की एक मुख्य बात बगियाबेरना में मियावाकी प्लांटेशन सिस्टम का दौरा था, जहाँ ज़िला मजिस्ट्रेट और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने प्लांटेशन के काम और इस ग्रीन पहल की प्रगति का जायज़ा लिया। गणमान्य व्यक्तियों ने भी उस जगह पर पौधे लगाकर प्लांटेशन अभियान में हिस्सा लिया। अपने सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत, एनटीपीसी दर्लीपाली ने DFO, झारसुगुडा के ज़रिए मियावाकी सिस्टम से 40,000 पौधे लगाने का काम शुरू किया है। इसमें वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लोइसिंग में 16,000 और बलांगीबहाल में 12,000 पौधे लगाना शामिल है। इस पहल का मकसद खाली पड़ी ज़मीन को फिर से इस्तेमाल के लायक बनाना, हरियाली बढ़ाना और इलाके में इकोलॉजिकल बैलेंस को बढ़ावा देना है। पौधे लगाने के लिए स्थानीय माहौल के हिसाब से कई तरह की औषधीय और फल देने वाली प्रजातियों को चुना गया है।
एनटीपीसी दर्लीपाली की इस पहल की गणमान्य लोगों ने तारीफ़ की और सराहा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और ज़िले में हरियाली बढ़ाने की दिशा में संस्था की कोशिशों को माना। एनटीपीसी दर्लीपाली के प्रोजेक्ट हेड, फ़ैज़ तैयब इस पहल से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। यह पहल आस-पास के समुदायों में पर्यावरण से जुड़ी मिली-जुली कोशिशों को सपोर्ट करने के लिए एनटीपीसी दर्लीपाली के कमिटमेंट को दिखाती है। यह पहल सस्टेनेबल डेवलपमेंट, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी पर संस्था के फ़ोकस को और मज़बूत करती है।
