किराये के कमरे से अपने भवन तक पहुंची बाल विकास सेवाएं, नौनिहालों को मिला सुरक्षित और सुविधायुक्त केंद्र
*11.69 लाख रुपये की लागत से बने नवीन भवन में 47 बच्चे और 9 गर्भवती एवं शिशुवती माताएं ले रही हैं पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा की सेवाएं*
रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आंगनबाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव के रूप में दिखाई दे रहे हैं। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सरुवत इसका प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है, जहां वर्षों तक किराये के कमरे में संचालित होने वाली आंगनबाड़ी अब अपने नवीन भवन में बच्चों के समग्र विकास का केंद्र बन गई है।
वर्ष 2025-26 में विकसित भारत-जी रामजी योजना, 15वें वित्त आयोग और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को एक साथ जोड़कर सरुवत में 11.69 लाख रुपये की लागत से नवीन आंगनबाड़ी भवन स्वीकृत किया गया। भवन निर्माण के लिए विकसित भारत-जी रामजी योजना से 8 लाख रुपये, 15वें वित्त आयोग से 1.69 लाख रुपये तथा महिला एवं बाल विकास विभाग से 2 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई। योजनाओं के प्रभावी अभिसरण से गांव की वर्षों पुरानी आवश्यकता का स्थायी समाधान संभव हो सका।
सरुवत का क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत दुर्गम है। निर्माण सामग्री को भवन स्थल तक पहुंचाना भी कठिन कार्य था। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ग्राम पंचायत और स्थानीय समुदाय ने निर्माण कार्य को प्राथमिकता देते हुए समयबद्ध ढंग से पूरा कराया। निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप मार्च 2026 में भवन का निर्माण निर्धारित समय से पहले पूर्ण कर लिया गया।
स्थानीय माताओं के लिए भी यह परिवर्तन राहत और भरोसे का कारण बना है। आंगनबाड़ी में आने वाली बालिका वर्षा की मां श्रीमती राजमती बताती हैं कि पहले बच्चों को आंगनबाड़ी भेजते समय चिंता रहती थी, लेकिन अब नया भवन बनने से सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिला है। बच्चों की देखभाल और गतिविधियां व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही हैं, जिससे अभिभावकों का विश्वास बढ़ा है। सरुवत की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं के प्रभावी अभिसरण, ग्राम पंचायत की सक्रिय भागीदारी और स्थानीय स्तर पर निरंतर प्रयासों से दूरस्थ क्षेत्रों में भी बाल विकास सेवाओं को मजबूत बनाया जा सकता है। किराये के कमरे से अपने भवन तक पहुंची यह आंगनबाड़ी आज गांव के नौनिहालों के लिए सुरक्षित बचपन, बेहतर पोषण और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन चुकी है।
