एमएमडीआर अधिनियम की धारा 22, 23(ख) और धारा 24 हुई संशोधित
सोनभद्र , सिंगरौली । कोयला क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधिक सुधार के तहत केंद्र सरकार द्वारा खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 22, धारा 23(ख) और धारा 24 में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। इस आशय की अधिसूचना कोयला मंत्रालय द्वारा जारी की गई है, जिसके तहत उपरोक्त वर्णित धारा 22 और धारा 24 में निहित सभी या किसी शक्ति का प्रयोग करने के लिए अपने अधिकार क्षेत्रों में सरकारी कोयला और लिग्नाइट कंपनियों के अधिकारियों और सीआईएसएफ़ को अधिकृत किया गया है।
उक्त अधिसूचना के माध्यम से एनसीएल के सभी क्षेत्रीय महाप्रबंधक, परियोजना अधिकारी, ख़ान प्रबंधक, एरिया नोडल ऑफिसर (सिक्योरिटी), एरिया मैनेजर (मानव संसाधन), सुरक्षा बल के कमांडेंट, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के वरिष्ठ कमांडेंट, सीआईएसएफ़ के डिप्टी कमांडेंट व सीआईएसएफ़ के सहायक कमांडेंट वर्णित धाराओं की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए अधिकृत हो गए हैं।
साथ ही धारा 23(ख) में बदलाव कर सीआईएसएफ़ को अवैध खनिज, दस्तावेज या वस्तु की तलाशी और जब्ती का कानूनी अधिकार भी दे दिया गया है।
*क्या कहती हैं एमएमडीआर अधिनियम की धारा 22 और धारा 24?*
दरअसल, एमएमडीआर एक्ट की धारा 22 अथवा इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तहत दंडनीय अपराध का संज्ञान किसी न्यायालय द्वारा तब तक नहीं लिया जाता है, जब तक कि केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा ‘अधिकृत अधिकारी’ लिखित शिकायत प्रस्तुत न करें। उपरोक्त अधिसूचना के माध्यम से ‘अधिकृत अधिकारी’ के इसी दायरे को बढ़ाते हुए एनसीएल के अधिकारियों के साथ-साथ सीआईएसएफ़ के अधिकारियों को इसमें समाहित किया गया है।
वहीं धारा 24 के तहत ‘अधिकृत अधिकारी’, जिनमें अब एनसीएल व सीआईएसएफ़ के अधिकारी भी सम्मिलित हैं, को अन्य अधिकारों के साथ निरीक्षण, जांच व संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ जैसे अधिकार प्राप्त हुए हैं।
साथ ही धारा 23(ख) के तहत अधिकृत अधिकारी, जिनमें सीआईएसएफ़ के अधिकारियों को भी संशोधन द्वारा जोड़ा गया है, वे अवैध खनिज उत्खनन अथवा अवैध खनन से जुड़े छिपाकर रखे गए खनिज, दस्तावेज या वस्तु की तलाशी ले सकते हैं।
सरल शब्दों में कहें तो अधिनियम में इन प्रमुख बदलावों से एनसीएल अधिकारियों व सीआईएसएफ़ अब सीधे अवांछित गतिविधियों में साक्ष्य संकलित कर कोर्ट में कंप्लेन (परिवाद) दायर कर सकते हैं। इस विधिक बदलाव से एनसीएल परिक्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलेगी।
