रेणुकूट। हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर आयोजित विचार गोष्ठी में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, चुनौतियों और सामाजिक दायित्वों पर व्यापक चर्चा हुई। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अजीत कुशवाहा की पत्रकारिता यात्रा भी चर्चा का विषय रही, जिन्होंने संघर्षों के बीच जमीन से उठकर अपनी मेहनत, ईमानदारी और निर्भीक लेखनी के दम पर समाज में एक अलग पहचान बनाई है। अपने संबोधन में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अजीत कुशवाहा ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र की सेवा का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि पत्रकार का सबसे बड़ा धर्म सत्य को सामने लाना और आम जनता की आवाज को सत्ता और प्रशासन तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि आज तकनीक और सोशल मीडिया के दौर में खबरों की गति बढ़ी है, लेकिन पत्रकारों की जिम्मेदारी भी पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
डॉ. कुशवाहा ने कहा कि पत्रकारिता के मूल मूल्य निष्पक्षता, सत्यता और जनहित हैं। यदि पत्रकार इन मूल्यों को बनाए रखे तो समाज में विश्वास और जागरूकता दोनों मजबूत होंगे। उन्होंने युवा पत्रकारों से अपील की कि वे सनसनीखेज खबरों की बजाय तथ्यों और जनसरोकारों को प्राथमिकता दें। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने भी डॉ. अजीत कुशवाहा के संघर्षपूर्ण जीवन और जनहित के मुद्दों को लगातार उठाने की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अपनी कलम को हमेशा गरीब, शोषित, पीड़ित और वंचित लोगों की आवाज बनाने का कार्य किया है। भ्रष्टाचार, सामाजिक कुरीतियों और जनसमस्याओं के खिलाफ उनकी निर्भीक पत्रकारिता युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
गोष्ठी में पत्रकारिता के पुराने दौर और वर्तमान डिजिटल युग की पत्रकारिता की तुलना करते हुए फेक न्यूज, सोशल मीडिया के प्रभाव, मीडिया की विश्वसनीयता तथा पत्रकारों की जवाबदेही पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि समय के साथ पत्रकारिता के स्वरूप में बदलाव आया है, लेकिन समाज और लोकतंत्र के प्रति उसकी जिम्मेदारी आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के अंत में पत्रकारिता और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पत्रकारों का सम्मान किया गया। उपस्थित लोगों ने वरिष्ठ पत्रकार डॉ. अजीत कुशवाहा की संघर्षशील यात्रा और जनहित में की जा रही पत्रकारिता की सराहना करते हुए कहा कि “जब कलम जनहित के लिए चलती है, तब वह समाज में बदलाव की ताकत बन जाती है।”
