“सुगम्य भारत” एवं “सबका साथ, सबका विकास” के संकल्प को साकार करने की दिशा में उत्तर मध्य रेलवे की अभिनव पहल

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  “दिव्यांगजन हमारे समाज की अमूल्य शक्ति हैं। उत्तर मध्य रेलवे उन्हें सम्मानजनक रोजगार, समान अवसर एवं आत्मनिर्भरता का मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है – नरेंश पाल सिंह

अनुरूप उत्तर मध्य रेलवे ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण एवं समावेशी रोजगार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की

नई दिल्ली , प्रयागराज ।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “सुगम्य भारत अभियान”  तथा “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास”  के विज़न के अनुरूप उत्तर मध्य रेलवे ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण एवं समावेशी रोजगार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। महाप्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे, नरेंश पाल सिंह के नेतृत्व में उत्तर मध्य रेलवे द्वारा विभिन्न संविदात्मक व्यवस्थाओं के माध्यम से 300 से अधिक बेंचमार्क दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं। यह पहल समान अवसर, सामाजिक न्याय एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016  की भावना के अनुरूप एक महत्वपूर्ण कदम है।

वर्तमान में उत्तर मध्य रेलवे के विभिन्न विभागों एवं इकाइयों में कुल 8,256 संविदा कर्मी कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 300 दिव्यांगजन विभिन्न भूमिकाओं में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन ऑपरेटर, स्टेशन उद्घोषक,  डाटा एंट्री ऑपरेटर, वन स्टेशन वन प्रोडक्ट  स्टॉल संचालक तथा अन्य ग्राहक सेवा एवं परिचालन संबंधी कार्य शामिल हैं।

उत्तर मध्य रेलवे ने केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक ही अपने प्रयासों को सीमित नहीं रखा है, बल्कि दीर्घकालिक सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में 100 दिव्यांग युवाओं को ‘एक्ट अप्रेंटिसशिप योजना’ के अंतर्गत कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता एवं भविष्य की संभावनाओं में वृद्धि हो सके। यह पहल उत्तर मध्य रेलवे के तीनों मंडलों- प्रयागराज,  झांसी एवं आगरा तथा विभिन्न कार्यशालाओं एवं उत्पादन इकाइयों में संचालित की जा रही है। संविदा आधारित दिव्यांग कर्मियों में से 164  प्रयागराज मंडल, 92 झांसी मंडल तथा 25  आगरा मंडल में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त झांसी स्थित विभिन्न कार्यशालाओं एवं उत्पादन इकाइयों में भी दिव्यांगजनों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

समावेशन के प्रति उत्तर मध्य रेलवे की प्रतिबद्धता उसके नियमित कार्यबल में भी परिलक्षित होती है। वर्तमान में उत्तर मध्य रेलवे में 784  दिव्यांग कर्मचारी स्थायी रूप से कार्यरत हैं,  जिनमें वर्ष 2025-26 के दौरान नियुक्त किए गए 15 कर्मचारी भी शामिल हैं। यह एक समावेशी एवं दिव्यांग-अनुकूल कार्यस्थल विकसित करने के प्रति संगठन की सतत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस अवसर पर उत्तर मध्य रेलवे, महाप्रबंधक  नरेंश पाल सिंह  ने कहा कि “दिव्यांगजन हमारे समाज की अमूल्य शक्ति हैं। उत्तर मध्य रेलवे उन्हें सम्मानजनक रोजगार, समान अवसर एवं आत्मनिर्भरता का मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। समावेशी विकास तभी संभव है जब समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे बढ़ने और योगदान देने का अवसर मिले।” उत्तर मध्य रेलवे उप महाप्रबंधक (सामान्य),  अतुल कुमार मिश्रा,  जो इस अभिनव पहल की सतत निगरानी कर रहे हैं, ने कहा कि”दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की भावना के अनुरूप उत्तर मध्य रेलवे ने विभिन्न विभागों एवं इकाइयों में दिव्यांगजनों की भागीदारी बढ़ाने हेतु विशेष अभियान चलाया है। 300 से अधिक दिव्यांगजनों को संविदा आधारित रोजगार एवं 100 युवाओं को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाना सामाजिक समावेशन एवं सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।”उत्तर मध्य रेलवे अपने सभी स्टेशनों,  कार्यालयों एवं कार्यस्थलों को दिव्यांग-सुगम्य  बनाने हेतु निरंतर प्रयासरत है,  ताकि दिव्यांगजन सम्मान, सुविधा एवं आत्मविश्वास के साथ अपनी सेवाएं प्रदान कर सकें तथा रेलवे सेवाओं का लाभ उठा सकें।

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