उत्तर मध्य रेलवे ने दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर के 69.5 किमी करछना-मिर्जापुर खंड पर ‘कवच 4.0’ की सफलतापूर्वक की कमीशनिंग
उत्तर मध्य रेलवे का कवच 4.0 नेटवर्क 785 रूट किलोमीटर तक पहुंचा; रेल संरक्षा सुदृढ़ीकरण में एक नया मील का पत्थर हासिल
प्रयागराज। रेलवे संरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, उत्तर मध्य रेलवे ने दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर के 69.5 रूट किलोमीटर करछना-मिर्जापुर खंड पर स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम, कवच संस्करण 4.0 (SIL-4) की सफल कमीशनिंग की है। इस खंड के चालू होने के साथ ही उत्तर मध्य रेलवे का कवच 4.0 नेटवर्क बढ़कर 785 रूट किलोमीटर हो गया है, जिसने दिल्ली-हावड़ा कॉरिडोर पर 700 किलोमीटर का महत्वपूर्ण आंकड़ा पार कर लिया है। यह उपलब्धि भारत के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर परिचालन सुरक्षा और विश्वसनीयता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

कवच 4.0 की मुख्य विशेषताएं:
• एसपीएडी की रोकथाम: सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) सहित संभावित संरक्षा उल्लंघनों की स्थिति में यह प्रणाली स्वचालित रूप से ब्रेक लगाती है।
• टक्कर से सुरक्षा: यह तकनीक आमने-सामने और पीछे से होने वाली ट्रेन टक्करों के खिलाफ सुरक्षा कवच प्रदान करती है।
• सुरक्षित संचालन: खराब मौसम या घने कोहरे के दौरान भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन में लोको पायलट की सहायता करती है।
इस खंड की सफल कमीशनिंग नरेश पाल सिंह, महाप्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे के दूरदर्शी नेतृत्व व मार्गदर्शन और श्री दीपक कुमार सिन्हा, प्रधान मुख्य सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर, उत्तर मध्य रेलवे के कुशल तकनीकी नेतृत्व में संपन्न हुई है। उनके निरंतर प्रोत्साहन, तकनीकी मार्गदर्शन और सूक्ष्म निगरानी ने इस प्रणाली के सफल कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिग्नल एवं दूरसंचार विभाग के समर्पित प्रयासों के साथ-साथ मैदानी टीमों और निष्पादन एजेंसियों के समन्वित योगदान से यह महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल किया जा सका है।
उत्तर मध्य रेलवे कवच अवसंरचना के विस्तार में लगातार प्रगति कर रहा है, जो भारतीय रेल के सुरक्षित, अधिक विश्वसनीय और तकनीकी रूप से उन्नत रेल नेटवर्क के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है|
