रामकथा वाचक रामचरित मानस मर्मज्ञ पंडित नाना लाल राजगुरू जी के अमृत संदेश से गुंजायमान हुआ रेनुसागर
अनपरा (सोनभद्र)। हिंडालको इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रेनुसागर के तत्वावधान में सुमंगलम भवन, रेनुसागर में तीन दिवसीय राम चरित्र मानस प्रवचन कार्यक्रम का भव्य एवं भक्तिमय शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हिंडालको रेनुसागर के यूनिट हेड आर. पी. सिंह, विशिष्ट अतिथि हेड एचआर आशीष पांडेय, सेफ्टी हेड अरविंद सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामचंद्र जी एवं संकटमोचन हनुमान जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर विधिवत पूजन-अर्चन किया। इसके पश्चात सभी अतिथियों ने सामूहिक रूप से रामायण की आरती एवं कथा वाचक का सम्मान कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि हिंडालको रेनुसागर के यूनिट हेड आर पी सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि हिंडालको रेनुसागर सदैव औद्योगिक गतिविधियों के साथ-साथ आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक मूल्यों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। इस प्रकार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन कर्मचारियों और उनके परिवारों को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने के साथ ही आपसी एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत करते हैं।एच आर हेड आशीष पांडेय ने अपने सम्बोधन में कहा कि श्रीरामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला महान जीवन दर्शन है।
रामचरित मानस की कथा वाचक रामचरित मानस मर्मज्ञ पंडित नाना लाल राजगुरू जी ने बाल कांड शिव पार्वती विवाह का कथा सुनाते हुये कहा कि शिव-पार्वती विवाह का यह पावन प्रसंग हमें बताता है कि जहां श्रद्धा है, वहां विश्वास है; जहां विश्वास है, वहां समर्पण है और जहां समर्पण है, वहां भगवान की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं एवं कर्मचारियों में विशेष उत्साह और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।कार्यक्रम को सफल बनाने में सदानन्द पांडेय ,अनिकेत दास ,रमेश बर्मा का सराहनीय सहयोग रहा।कार्यक्रम का सफल संचालन सदानन्द पांडेय ने किया।धन्यवाद ज्ञापित ईआर हेड मृदुल भरद्वाज ने किया।इस अवसर पर हिंडालको रेनुसागर के अधिकारी बृजेश बर्मा,नाऊष त्रिपाठी ,देवेन्द्र त्रिपाठी एवं मान्यता प्राप्त श्रम संगठन के पदाधिकारी सहित भारी संख्या में स्रोता मौजूद रहे।कार्यक्रम के अंत मे प्रसाद वितरण किया गया।
