KVK वाराणसी में CSR Maruti परियोजना के अंतर्गत किसानों को दी गई FOM के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी
वाराणसी,। खेती की लागत को संतुलित करने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाने और कृषि में उपलब्ध जैविक संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में Fermented Organic Manure (FOM) किसानों के लिए एक उपयोगी विकल्प बनकर उभर रहा है। FOM के वैज्ञानिक उपयोग, खेत में प्रभावी प्रयोग तथा टिकाऊ कृषि में इसकी भूमिका के प्रति किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से मंगलवार को कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), वाराणसी में CSR Maruti परियोजना के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), नई दिल्ली के Division of Agronomy के सहयोग से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में लगभग 150 किसानों एवं कृषि से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का आयोजन IARI, नई दिल्ली के Division of Agronomy के प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष तथा परियोजना समन्वयक डॉ. संजय सिंह राठौर एवं परियोजना के सह-समन्वयक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार सिंह के मार्गदर्शन एवं सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में KVK वाराणसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष तथा पादप रोग विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. नवीन कुमार सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए FOM के वैज्ञानिक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और फसल स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी।
प्रशिक्षण के दौरान शस्य विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. अमितेश कुमार सिंह ने किसानों को FOM के फसल उत्पादन में उपयोग की विधि, उचित मात्रा, प्रयोग का समय तथा फसल की आवश्यकता के अनुसार इसके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण के आधार पर पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि जैविक खादों का वैज्ञानिक एवं संतुलित उपयोग मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
उद्यान विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. मनीष पांडेय ने सब्जी एवं बागवानी फसलों में जैविक खादों के उपयोग तथा मृदा की गुणवत्ता बनाए रखने से जुड़े पहलुओं पर किसानों को जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जैविक संसाधनों के उचित प्रबंधन और उनके व्यावहारिक उपयोग पर जोर दिया। किसानों को बताया गया कि फसल की आवश्यकता और मृदा की स्थिति के अनुसार जैविक संसाधनों का उपयोग अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
बीज प्रौद्योगिकी वैज्ञानिक डॉ. सर्वजीत कुमार ने गुणवत्तापूर्ण बीज, स्वस्थ फसल स्थापना और मृदा स्वास्थ्य के बीच संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को बेहतर फसल उत्पादन के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज के साथ उचित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने फसल उत्पादन में बीज की गुणवत्ता के साथ मृदा की अनुकूल स्थिति को भी महत्वपूर्ण बताया।
वहीं कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. राहुल कुमार सिंह ने वैज्ञानिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने और खेत स्तर पर उनके प्रभावी प्रयोग की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने किसानों की FOM से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा वैज्ञानिक जानकारी को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अपनाने के संबंध में सुझाव दिए। प्रशिक्षण के दौरान किसानों और वैज्ञानिकों के बीच सीधे तकनीकी संवाद से किसानों को अपनी समस्याओं पर चर्चा करने का अवसर मिला। पशुपालन वैज्ञानिक श्रीमती पूजा सिंह ने कृषि एवं पशुपालन के बीच समन्वय तथा पशुधन से प्राप्त जैविक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जानकारी दी। उन्होंने किसानों को उपलब्ध जैविक संसाधनों के उचित उपयोग के संबंध में आवश्यक सुझाव दिए और कृषि प्रणाली में संसाधनों के पुनः उपयोग के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने FOM की तैयारी, भंडारण, खेत में प्रयोग की विधि, उचित मात्रा तथा फसल के अनुसार इसके उपयोग से जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाया। किसानों को बताया गया कि जैविक खादों का उपयोग मृदा परीक्षण एवं फसल की आवश्यकता के आधार पर संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के साथ किया जाना चाहिए। जैविक एवं रासायनिक स्रोतों के समन्वित उपयोग से मृदा की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने FOM के खेत में प्रयोग, फसल उत्पादन में इसकी उपयोगिता, भंडारण तथा अन्य जैविक खादों के साथ इसके उपयोग से संबंधित कई प्रश्न विशेषज्ञों के सामने रखे। वैज्ञानिकों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए FOM के प्रभावी और वैज्ञानिक उपयोग के बारे में आवश्यक जानकारी दी। इस अवसर पर कृषि अवशेषों एवं अन्य जैविक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि में उपलब्ध जैविक संसाधनों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करने से कृषि अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में सहायता मिल सकती है।
कार्यक्रम में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और FOM से संबंधित तकनीकी जानकारी में विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम ने किसानों एवं कृषि वैज्ञानिकों के बीच तकनीकी संवाद को मजबूत करने तथा FOM के वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
