ईसीएल के सीएमडी ने आत्मनिर्भर भारत के निर्माण हेतु संतुलित ऊर्जा संक्रमण का किया आह्वान

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आसनसोल । ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक  सतीश झा ने शुक्रवार को कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में कोयला भविष्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा, जबकि उभरती हरित प्रौद्योगिकियाँ सतत भविष्य की दिशा में ऊर्जा संक्रमण को गति प्रदान करेंगी। कोलकाता में आयोजित एसोचैम ऊर्जा सम्मेलन एवं उत्कृष्टता पुरस्कार 2026 के 7वें संस्करण के उद्घाटन सत्र को मुख्य वक्तव्य के रूप में संबोधित करते हुए श्री झा ने भारत के ऊर्जा संक्रमण को गति देने के लिए पारंपरिक एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के समन्वित तथा संतुलित उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

इस राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, विद्युत क्षेत्र के विशेषज्ञों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, शोधकर्ताओं तथा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों ने भाग लिया। सम्मेलन में भारत के विकसित हो रहे ऊर्जा परिदृश्य तथा एक सुदृढ़ एवं सतत ऊर्जा पारितंत्र के निर्माण के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

उद्घाटन सत्र में पश्चिम बंगाल सरकार के विद्यालय शिक्षा, एमएसएमई एवं वस्त्र तथा आवासन विभाग के प्रभारी मंत्री दीपक बर्मन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर अन्य विशिष्ट वक्ताओं में दामोदर वैली कॉर्पोरेशन के सदस्य (तकनीकी) स्वप्नेंदु कुमार पांडा, पश्चिम बंगाल ग्रीन एनर्जी डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के पूर्व प्रबंध निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. पी. गोन चौधुरी, सीईएससी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक (वितरण) विनीत सिक्का, एसोचैम ऊर्जा परिषद (पूर्व) के अध्यक्ष सोमेश दासगुप्ता, सह-अध्यक्ष पार्थ पी. चटर्जी तथा एसोचैम के उपनिदेशक एवं राज्य प्रमुख (पश्चिम बंगाल) रमित सरकार शामिल थे।

सभा को संबोधित करते हुए  झा ने कहा कि भारत का भविष्य ऐसे समन्वित ऊर्जा मिश्रण के विकास में निहित है, जिसमें पारंपरिक एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत एक-दूसरे के पूरक के रूप में कार्य करें। उन्होंने कहा कि यद्यपि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है, फिर भी भारत में विद्युत उत्पादन का प्रमुख आधार आज भी कोयला है, जो औद्योगिक विकास, परिवहन, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि तथा घरेलू ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

ऊर्जा संक्रमण में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए श्री झा ने हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स, स्वचालन, स्मार्ट ग्रिड, डिजिटल सबस्टेशन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) तथा उन्नत नियंत्रण प्रणालियों की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नवाचार एवं डिजिटलीकरण ग्रिड की विश्वसनीयता बढ़ाने, परिचालन दक्षता में सुधार लाने तथा चौबीसों घंटे स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। ऊर्जा संक्रमण को पर्यावरणीय आवश्यकता के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर बताते हुए श्री झा ने कहा कि इसमें व्यापक रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करने, ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अंतर्गत घरेलू विनिर्माण को सुदृढ़ बनाने तथा भारत को सतत ऊर्जा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की अपार संभावनाएँ निहित हैं।

ईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक ने विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप सुरक्षित, किफायती, समावेशी एवं पर्यावरणीय दृष्टि से उत्तरदायी ऊर्जा पारितंत्र के निर्माण के लिए सरकार, उद्योग, शिक्षण एवं शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, वित्तीय संस्थाओं, स्टार्ट-अप्स तथा उपभोक्ताओं के बीच व्यापक सहयोग का आह्वान किया। भारत के ऊर्जा संक्रमण में उत्तरदायी कोयला खनन तथा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के समावेश के माध्यम से ईसीएल की प्रतिबद्धता दोहराते हुए श्री झा ने कहा कि सहयोग एवं नवाचार देश के दीर्घकालिक ऊर्जा एवं सतत विकास संबंधी लक्ष्यों की प्राप्ति के प्रमुख आधार बने रहेंगे।

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