क्रिटिकल मिनरल्स एवं सतत विकास के क्षेत्र में सीएमपीडीआई ने ड्यूक विश्वविद्यालय अमेरिका के साथ साझेदारी की

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रांची । सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (CMPDIL) ने क्रिटिकल मिनरल्स एवं सतत विकास के क्षेत्र में सहयोग के लिए ड्यूक विश्वविद्यालय, अमेरिका के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन सीएमपीडीआई और ड्यूक विश्वविद्यालय के बीच पारस्परिक हित के क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी विशेषज्ञता एवं ज्ञान के आदान-प्रदान का लाभ उठाते हुए खनन एवं ऊर्जा क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों का समाधान करना है। यह समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर की तिथि से पाँच वर्षों की अवधि तक प्रभावी रहेगा। ड्यूक विश्वविद्यालय, अमेरिका, एक अग्रणी वैश्विक शोध विश्वविद्यालय है, जिसकी इंजीनियरिंग, पर्यावरण विज्ञान, भू-विज्ञान, ऊर्जा प्रणालियों, नीतिगत अध्ययन एवं सतत विकास के क्षेत्रों में मजबूत अंतर्विषयक विशेषज्ञता है।

इस सहयोग के अंतर्गत, ड्यूक विश्वविद्यालय उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान, खनिज लक्षण-निर्धारण (Mineral Characterization), कार्यप्रणाली के विकास एवं प्रक्रिया अनुकूलन के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। वहीं, सीएमपीडीआई भारत में फील्ड ऑपरेशन, नमूना संग्रह, तकनीकी आंकड़ों तथा संस्थागत समन्वय में सहयोग प्रदान करेगा। सहयोग का एक प्रमुख क्षेत्र कोयला एवं खनन से संबंधित द्वितीयक संसाधनों जैसे ओवरबर्डन, कोयला रिजेक्ट, फ्लाई ऐश एवं अम्लीय खान जल (Acid Mine Drainage) से क्रिटिकल मिनरल्स के आकलन एवं संभावित पुनर्प्राप्ति का अध्ययन है। इस सहयोग के अंतर्गत उन्नत भू-रासायनिक एवं खनिजीय लक्षण-निर्धारण, नमूनों का परीक्षण एवं सत्यापन, परीक्षण प्रोटोकॉल का विकास तथा रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs), लिथियम एवं ग्रेफाइट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की पुनर्प्राप्ति से संबंधित अनुसंधान किया जाएगा।

यह समझौता ज्ञापन कम-कार्बन एवं शून्य-कार्बन ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, डीकार्बोनाइजेशन के मार्ग, सतत ऊर्जा प्रणालियों, खदानों के पुनर्प्रयोजन (Mine Repurposing) एवं खनन के बाद भूमि उपयोग (Post-Mining Land Use) के क्षेत्रों में भी सहयोग को शामिल करता है। इसके अतिरिक्त, मीथेन की निगरानी, शमन एवं उत्सर्जन में कमी तथा कोयला खनन गतिविधियों एवं परित्यक्त खदानों से संबंधित कार्बन क्रेडिट के आकलन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग की परिकल्पना की गई है।

यह समझौता ज्ञापन अंतरराष्ट्रीय ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण एवं क्रिटिकल मिनरल्स तथा सतत खनन के उभरते क्षेत्रों में तकनीकी क्षमताओं के विकास को बढ़ावा देगा। साथ ही, यह सीएमपीडीआई की तकनीकी एवं परामर्श क्षमताओं में विविधता लाने तथा विशेषज्ञता के नए क्षेत्रों के विकास के प्रयासों को भी समर्थन प्रदान करेगा। सीएमपीडीआई और ड्यूक विश्वविद्यालय के बीच यह सहयोग भारत की खनन क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं वैश्विक अनुसंधान क्षमताओं को एक साथ लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह साझेदारी खनिज संसाधनों एवं खनन से संबंधित द्वितीयक संसाधनों के सतत उपयोग एवं प्रभावी प्रबंधन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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