बलशाली एवं तंत्र मंत्र के जानकार थे बेचूबीर बाबा

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उनके चौरी पर प्रतिवर्ष कार्तिक अष्टमी से एकादशी तक लगता है मेला 

अहरौरा, मिर्जापुर। क्षेत्र में जरगो नदी तट पर बसे जंगल महाल गांव में बेचूबीर बाबा की चौरी पर प्रतिवर्ष कार्तिक अष्टमी से एकादशी तक लगता है तीन दिवसीय भूतों का मेला। लाखों की संख्या में निःसंतान महिलाओं का जरगो नदी में स्नान करने को जमावड़ा लगता है। 

 बेचूबीर मेला के व्यवस्थापक रोशन लाल यादव ने बताया की बेचूबीर एक ऐतिहासिक स्थल है इसका नाम प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में अंकित होना चाहिए।रोशन लाल यादव ने बताया कि बेचूबीर बाबा का एक अद्भुत इतिहास है। भगवान शंकर के घोर उपासक बेचू यादव लगभग ढाई-तीन सौ वर्ष पूर्व से ही बेचूबीर बाबा के नाम से देशभर में विख्यात हैं। जहां पर बेचूबीर बाबा की चौरी है उसी स्थान पर बेचूबीर तीन दिन और तीन रात एक बाघ से लड़ते-लड़ते मृत्यु को प्राप्त हुए थे। 

बलशाली बाघ की भी लड़ाई के दौरान घायल होकर मौत हो गई थी। बेचूबीर की अंतिम इच्छा थी कि जहां उनकी सांस रुके वहीं उनको समाधि दे दी जाए। बेचूबीर के पुत्र रघुराई ने शरीर को समाधि दिया जो आज बेचूबीर बाबा की चौरी के रूप में विख्यात है। बेचूबीर की मुख्य पूजा दशमी की रात व एकादशी की प्रातः 3-4 बजे के बीच उनके वंशज ब्रजभूषण यादव द्वारा संपन्न की जाती है। बेचूबीर बाबा के प्राण पखेरू 3-4 बजे भोर में उड़े थे। इसलिए इसी समय मुख्य पूजा होती है। बेचूबीर बाबा की चौरी का स्पर्श होते ही पीड़ितों को प्रेत-बाधा से मुक्ति मिल जाती है। नाउम्मीद महिलाओं की सुनी गोद भर जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्य पूजा में पीली और सफेद धोती, नारियल, खड़ाऊँ, मिठाई,फल, फूल, माला के साथ स्वेच्छया दक्षिणा चढ़ाई जाती है।

 मुख्य पूजा के दिन बकरा का कान काटकर चढ़ाया जाता है, लेकिन बलि नहीं दी जाती है। बेचूबीर बाबा की चौरी का स्पर्श करने से पहले जरगो नदी में स्नान करना होता है। जो वस्त्र पहनकर स्नान किया जाता है उसे वहीं छोड़ दिया जाता है। प्रेत- बाधा से ग्रसित लाखों की संख्या में महिलाओं का स्नान करने के लिए जरगो नदी के तट पर जमावड़ा होता है। मेला व्यवस्थापक ने बताया की कार्तिक माह में तीन दिवसीय लगने वाली बेचूबीर बाबा की मेला का नाम उत्तर प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में अंकित होना चाहिए। क्योंकि करीब 5 लाख से भी ज्यादे लोगों की भीड़ होती है। इसमें प्रमुख रूप से पांच प्रांतों यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़, झारखंड व बिहार से लोग आते हैं। हालांकि इस मेले में देश भर से लोग आते हैं। पर्यटन मानचित्र में नाम अंकित होने पर ही बेचूबीर बाबा के मेला स्थल का सर्वागीण विकास हो सके।

छठवें पीढ़ी के वंशज हैं तीन भाई 

बेचूबीर बाबा के छठवें पीढ़ी के वंशज तीन भाई हैं जो पुजारी से लेकर व्यवस्थापक का कार्य देखते हैं। ये लोग सोनभद्र जिला अंतर्गत चोपन थाना क्षेत्र के मारकुंडी गांव में रहते हैं। वंशजों पर गौर करें तो बेचूबीर के लड़के रघुराई, रघुराई के लड़के शोभनाथ, शोभनाथ के लड़के बैजनाथ, बैजनाथ के लड़के लालता यादव पांचवीं पीढ़ी के वंशज रहे। अब छठवें पीढ़ी के वंशज लालता यादव के तीन लड़के संतलाल यादव,ब्रजभूषण यादव व रोशनलाल यादव शामिल हैं।

19 नवंबर को समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गोड़ आएंगे बेचूबीर मेला

बेचूबीर बाबा मेला के व्यवस्थापक रोशनलाल यादव ने बताया कि उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गोड़ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ ही डीएम मिर्जापुर व एसपी मिर्जापुर को पत्रक देकर बेचूबीर बाबा मेला की सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए मांग किया है। उन्होंने यह भी बताया कि 19 नवंबर की शाम 5 बजे मंत्री जी मुख्य पूजा कार्यक्रम में शामिल होंगे।

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