लखनऊ: मुख्य सचिव एस. पी. गोयल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) को और अधिक सुगम एवं निवेशकों के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से ‘अनुपालन न्यूनीकरण एवं विनियमन शिथिलीकरण 2025’ (Compliance Reduction & Deregulation) पहल की प्रगति की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में अनावश्यक अनुपालन बोझ को कम करने (Reducing unnecessary compliance burdens), व्यावसायिक गतिविधियों को तेज करने तथा निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के लिए व्यापक चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने कहा कि डिरेगुलेशन 2.0 के उपायों से राज्य में निवेश आकर्षण में वृद्धि, उद्योग स्थापना में तेजी, एमएसएमई क्षेत्र को प्रोत्साहन, रोजगार सृजन, किसानों एवं भूमि स्वामियों को अनावश्यक परेशानियों से मुक्ति, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी। इससे समग्र आर्थिक विकास को बल मिलेगा और उत्तर प्रदेश देश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और अधिक सुगम एवं निवेशकों के लिए सुविधाजनक बनाने में मदद मिलेगी।

गोयल ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि प्रस्तुत बिन्दुओं का गहन अध्ययन कर शीघ्र क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। जिन प्रस्तावों को तत्काल लागू करना संभव नहीं है, उनके कारणों सहित एक सप्ताह के अंदर इन्वेस्ट यूपी विभाग को अवगत कराया जाए। अन्य राज्यों की सर्वोत्तम प्रथाओं को भी अपनाया जाए। यह पहल उत्तर प्रदेश को निवेशकों के लिए अत्यंत आकर्षक गंतव्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इससे पहले बैठक में भूमि उपयोग नियमों को सरल बनाने, औद्योगिक क्लस्टरों में भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने, निर्माण अनुमति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने,अग्निशमन मानदंडों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप बनाने,व्यवसायों के लिए ड्यूल लाइसेंसिंग समाप्त करने, दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के नियमों को उदार बनाने तथा लीगल मेट्रोलॉजी से संबंधित लाइसेंसिंग को आसान बनाने जैसे अनेक प्रस्तावों पर विस्तार से विचार किया गया।
इसके अलावा, राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण को औद्योगिक क्लस्टरों में एकल नोडल एजेंसी बनाने, एमएसएमई को सेल्फ-डिक्लेरेशन आधारित सुविधाएं एवं निरीक्षणों से सुरक्षा प्रदान करने, बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को तेज करने,SEAC-SEIAA की बैठकें अधिक नियमित करने, डिग्रेडेड फॉरेस्ट एवं नॉन-फॉरेस्ट भूमि का लैंड बैंक तैयार करने,पर्यटन के लिए सस्ता एवं गुणवत्तापूर्ण आवास बढ़ाने, निजी स्कूलों, विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए न्यूनतम भूमि, एंडोमेंट फंड तथा इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी शर्तों में छूट देने, स्वास्थ्य क्षेत्र में पंजीकरण एवं लाइसेंसिंग को सरल करने, सिंगल विंडो सिस्टम के टर्नअराउंड टाइम को कम करने,सभी नियमों का केंद्रीकृत डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने तथा “राइट टू बिजनेस एक्ट” के तहत सरल क्लियरेंस सिस्टम लागू करने जैसे प्रस्तावों पर गहन चर्चा हुई।
बैठक में अपर मुख्य सचिव ऊर्जा डा0 आशीष कुमार गोयल,अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा,सीईओ इनवेस्ट यूपी श्री विजय किरन आनंद,महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डा0 सारिका मोहन, आबकारी आयुक्त डा0 आदर्श सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।
