एबीडीएम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक व्यवस्थित, सुगम और मरीज-केंद्रित बनाना है- रितु महेश्वरी

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*डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए संबंधित विभागों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है-एस. राजलिंगम* 

*आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन पर रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में हुआ कार्यशाला*

*आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन पर मंथन, सरकारी व निजी स्वास्थ्य संस्थानों को जोड़ने पर जोर* 

वाराणसी। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन एवं डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से बुधवार को रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में एबीडीएम कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, स्वास्थ्य संस्थानों तथा निजी क्षेत्र के चिकित्सकों एवं अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, उत्तर प्रदेश की सचिव एवं मिशन निदेशक आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तर प्रदेश रितु माहेश्वरी, साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा एवं मंडलायुक्त एस. राजलिंगम प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

  सचिव रितु माहेश्वरी ने अपने संबोधन में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के अंतर्गत प्रदेश एवं जनपद स्तर पर अब तक हुई प्रगति के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, अधिक से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को एबीडीएम से जोड़ने तथा डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एबीडीएम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल माध्यम से अधिक व्यवस्थित, सुगम और मरीज-केंद्रित बनाना है।

 मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने कहा कि कार्यशाला के दौरान एबीडीएम के संबंध में दी गई जानकारी एवं समझ को मंडल के स्वास्थ्य संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू करने का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सभी संबंधित विभागों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी अर्चना वर्मा ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन एवं आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के बीच बेहतर डिजिटल समन्वय के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को एबीडीएम के डिजिटल सिस्टम के साथ समन्वित रूप से संचालित करने से लाभार्थियों एवं स्वास्थ्य संस्थानों के लिए सेवाओं की प्रक्रिया को अधिक सुगम और प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रभावी उपयोग तथा आवश्यक प्रक्रियाओं को अपनाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एन पी सिंह ने उपस्थित सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं चिकित्सकों का स्वागत किया। उन्होंने एबीडीएम के प्रभावी क्रियान्वयन में स्वास्थ्य विभाग एवं संबद्ध स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला।कार्यशाला का संचालन संयुक्त निदेशक आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन उत्तर प्रदेश डॉ. मोहित सिंह द्वारा किया गया। कार्यक्रम में तीनों मंडलों से आए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, प्रमुख/मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों, निजी मेडिकल कॉलेजों एवं निजी चिकित्सालयों के चिकित्सा अधीक्षकों सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों एवं चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों द्वारा एबीडीएम के क्रियान्वयन, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, स्वास्थ्य रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण तथा स्वास्थ्य संस्थानों में इसके उपयोग से संबंधित विषयों पर अपने विचार एवं अनुभव साझा किए गए।

     कार्यशाला में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी एवं निजी क्षेत्र के अधिक से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को एबीडीएम से जोड़कर डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए, ताकि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ अधिक सुगम एवं व्यवस्थित तरीके से मिल सके। 

      कार्यक्रम में नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत सैगल, हेरिटेज मेडिकल कॉलेज के प्रबंधक डॉ सिद्धार्थ राय, आई एम ए अध्यक्ष डॉ अनुराग टंडन एवं पंडित महामना कैंसर केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉ आकाश तथा आईएमए अध्यक्ष जौनपुर डॉ सुधा के द्वारा मंच साझा किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक जिला महिला चिकित्सालय वाराणसी डॉ मनीषा सिंह सेंगर के द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित समस्त अतिथियों सहित तीनों मंडलों के प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया गया।

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