मुख्यमंत्री ने जनपद बस्ती में सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का भूमि पूजन एवं शिलान्यास किया
देश में विद्या भारती शिक्षण संस्थान के अन्तर्गत संचालित हजारों शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाएं राष्ट्र निर्माण के अभियान से जुड़ीं
हमें प्रभु श्रीराम व लीलाधारी श्रीकृष्ण की परम्परा व विरासत पर गौरव की अनुभूति होती
उ0प्र0 देश का ग्रोथ इंजन बनकर प्रथम अर्थव्यवस्था बनने की ओर निरन्तर अग्रसर
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारतीय मनीषा ने ज्ञान के विषय में कहा है कि ‘सा विद्या या विमुक्तये’ अर्थात विद्या वह है, जो हमारी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर दे। मुक्ति का तात्पर्य यह है कि विद्या हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए मार्ग प्रशस्त कर दे। भारत में ऐसे शिक्षण संस्थानों की स्थापना आवश्यक है, जो भारत को फिर से विश्व गुरु बनाने में अपना योगदान दे सकें। आज महर्षि वशिष्ठ की स्मृति से जुड़ी हुई इस पावन धरा पर सरस्वती विद्या मन्दिर का भूमि पूजन किया जा रहा है। सरस्वती शिशु मन्दिर के इस बड़े प्रकल्प को अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान विद्या भारती के तत्वावधान में नए रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
मुख्यमंत्री आज जनपद बस्ती में सरस्वती विद्या मन्दिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का भूमि पूजन एवं शिलान्यास करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने मंत्री डॉ0 शैलेश सिंह द्वारा लिखित पुस्तक पं0 दीन दयाल उपाध्याय एवं एकात्मक मानवदर्शन का विमोचन किया। कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री जी ने विद्यालय के प्रांगण में पौधरोपण किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन कारकों से यह देश परतंत्र हुआ था, उन कारकों का सामधान करने के लिए स्वतंत्र भारत में तत्काल कोई उपचारात्मक उपाय नहीं किए गए। इन्हीं विसंगतियां को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तत्कालीन प्रचारक श्रद्धेय नाना जी देशमुख के नेतृत्व में गोरक्ष प्रान्त के गोरखपुर में सरस्वती शिशु मन्दिर की पहली शाखा स्थापित की गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरक्ष प्रान्त सौभाग्यशाली है कि उसे विद्या भारती जैसे अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान की मातृभूमि होने का सौभाग्य प्राप्त है। देश में विद्या भारती शिक्षण संस्थान के अन्तर्गत संचालित हजारों शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थाएं राष्ट्र निर्माण के अभियान से जुड़ी हुई हैं। शिक्षण संस्थान केवल ज्ञान के माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला भी रखते हैं। यदि शिक्षा संस्कारयुक्त, महापुरूषों, मातृभूमि व राष्ट्र के प्रति समर्पण के भाव से युक्त व मूल्यों पर आधारित नहीं है, तो वह शिक्षा नहीं, भटकाव का माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरस्वती शिशु मन्दिर से निकले विद्यार्थी जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समाज को नेतृत्व प्रदान करने के साथ मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। यह विद्यार्थी समाज को नई गति देकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प से प्रतिबद्धता के साथ जुड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। किसी भी देश को शक्तिशाली, आत्मनिर्भर व सामर्थ्यवान बनने की शुरूआत शिक्षा से होती है। दुनिया में समृद्धि का पहला पैरामीटर शिक्षा ही है। शिक्षा के बाद स्वास्थ्य, स्वास्थ्य के बाद कृषि व जल संसाधन तथा इसके बाद कौशल विकास व रोजगार को प्राथमिकता दी जाती है। पर्यावरण अनुकूल विकास कार्य करना आवश्यक है। इन सभी पैरामीटर्स के माध्यम से समग्र विकास की अवधारणा तय की जाती है। समग्र विकास के लक्ष्य के साथ जब कोई अभियान आगे बढ़ता है, तो वह देशहित के साथ-साथ मानवता का मार्ग भी प्रशस्त करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब बिना किसी योजना के कार्य करते हैं, तो हम असफल हो जाते हैं। किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक अच्छी कार्ययोजना का होना आवश्यक है। सरकार द्वारा प्रत्येक वर्ष प्रस्तुत किये जाने वाले बजट का एक तय विजन होता है। प्रधानमंत्री जी ने भारत की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में देशवासियों से आगामी 25 वर्षों की कार्ययोजना बनाने को कहा था। उन्होंने कहा था कि भारत विकसित तब बनेगा, जब यहां का प्रत्येक नागरिक पंचप्रणों को अपने जीवन का हिस्सा बनाएगा। हमें अपनी विरासत का सम्मान करना होगा। अपने पूर्वजों व परम्पराओं पर गौरव की अनुभूति करनी होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के लिए बलिदान देने वाले महापुरूषों का सम्मान करना व उनकी विरासत का संरक्षण करना प्रत्येक भारतीय का दायित्व है। गुलामी के अंशों को सर्वथा समाप्त करना भी आवश्यक है। एक समय देश में गुलामी की मानसिकता इस कदर हावी हो गयी थी कि प्रत्येक भारतीय स्वयं को हेय दृष्टि से देखने लगा था। विदेशियों को सम्मानित समझा जाता था। विगत 11 वर्षों में इस दुष्प्रवृत्ति पर रोक लगायी गयी है। प्रत्येक भारतीय सर्वश्रेष्ठ है। विदेशियों द्वारा बनायी गयी सम्पत्ति दुनिया के अन्य देशों से लूटकर अर्जित की गयी है, लेकिन भारत ने अपने पुरूषार्थ से अपनी समृद्धि का रास्ता तय किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने ‘वोकल फॉर लोकल‘ अवधारणा पर बल दिया है। स्वदेशी वस्तुओं को प्राथमिकता देना ही ‘वोकल फॉर लोकल‘ की अवधारणा है। पर्व व त्योहारों पर स्थानीय हस्तशिल्पियों व कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं को ही अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। इससे हमारे हस्तशिल्पियों व कारीगरों का मुनाफा बढ़ेगा। विदेशी कम्पनियों को प्राप्त मुनाफे का प्रयोग देशविरोधी गतिविधियों में किया जाता है। पहलगाम जैसी घटनाएं इसका उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बेहतर कानून व्यवस्था के माध्यम से माफियाओं नकेल कसी जा चुकी है। बेटियों, व्यापारियों तथा समाज के अन्य तबकों में सुरक्षा का भाव उत्पन्न हुआ है। हमें अपने गांव, नगर व मोहल्ले से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की शुरुआत करनी चाहिए। नागरिक कर्तव्य इसमें महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे। हमारे शिक्षण संस्थानों को इसका केन्द्रबिन्दु बनने की आवश्यकता है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

गांव गिराँव हिंदी न्यूज़ पोर्टल पर आप – Latest Breaking News, देश, विदेश, खेल, मनोरंजन, राजनीति, क्राइम, ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, लाइफस्टाइल, क्रिकेट से सम्बंधित सभी समाचार प्राप्त करते है।
