अभिषेक उपाध्याय के सशक्त अभिनय और ब्रजेन्द्र त्रिपाठी के मंत्रमुग्ध कर देने वाले स्वरों ने दर्शकों के हृदय पर छोड़ी अमिट छाप
महान, सिंगरौली। नवरात्रि के शुभारंभ की पूर्व संध्या पर हिंडालको महान के कर्मचारियों द्वारा आयोजित रामलीला का भव्य शुभारंभ हुआ। आस्था, भक्ति और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से सजे इस आयोजन के प्रथम दिन शिव-सती प्रसंग, दक्ष यज्ञ, दक्ष वध एवं भगवान शिव के विलाप का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय, प्रभावशाली संवादों और भक्तिमय प्रस्तुतियों ने दर्शकों को पौराणिक कथाओं की भावभूमि से जोड़ दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ हुआ। इस अवसर पर स्मेल्टर हेड एस. शशि कुमार, मैकेनिकल हेड आदर्श, कार्मिक प्रमुख रंधीर वत्स, मानव संसाधन विभाग से प्रणव सोनी सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख उपस्थित रहे।

इसके पश्चात मंच पर शिव-सती प्रसंग का सजीव चित्रण किया गया। भगवान शिव की भूमिका निभा रहे अभिषेक उपाध्याय ने अपने दमदार अभिनय, हृदयस्पर्शी विलाप और ऊर्जावान तांडव से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके अभिनय में भावनाओं की गहराई और पात्र के प्रति समर्पण स्पष्ट दिखाई दिया, जिसने दर्शकों के हृदय पर अमिट छाप छोड़ी। वहीं, व्यास पीठ पर विराजमान ब्रजेन्द्र त्रिपाठी के सुमधुर स्वर, श्लोकों और मंत्रोच्चार ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए पर्चेज हेड एवं रामलीला कमेटी प्रमुख राम जतन गुप्ता ने आयोजन की पृष्ठभूमि और उद्देश्य से सभी को अवगत कराया। इस अवसर पर इकाई प्रमुख लिनु पंचमन एवं मानव संसाधन प्रमुख डॉ. विवेकानन्द मिश्रा ने सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने रामलीला के विभिन्न पात्रों की भूमिका निभा रहे कलाकारों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया। साथ ही, अधिकारियों एवं कर्मचारियों से अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों के साथ रामलीला में सहभागिता करने की अपील की, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और जीवन मूल्यों से परिचित हो सके।
मानव संसाधन प्रमुख डॉ. विवेकानन्द मिश्रा ने कहा कि रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों में संस्कार और नैतिक मूल्यों के विकास का सशक्त माध्यम है। भगवान राम का आदर्श चरित्र हमें सत्य, मर्यादा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की सीख देता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को रामलीला दिखाने के साथ-साथ रामायण के प्रसंगों और उनसे मिलने वाली शिक्षाओं से परिचित कराने की अपील की, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति को समझते हुए इन आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर सके।
अपने संदेश में इकाई प्रमुख लिनु पंचमन ने भगवान राम के आदर्श चरित्र को जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने रामायण के पात्रों से मिलने वाली सीख को कार्यस्थल से जोड़ते हुए कहा कि मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन, समर्पण, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना किसी भी संगठन की सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं। रामायण के प्रसंग हमें आदर्श जीवन जीने के साथ-साथ आपसी सहयोग, बेहतर प्रबंधन और कार्यकुशलता का महत्व भी समझाते हैं। हिंडालको महान के कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत यह रामलीला कार्यस्थल पर सांस्कृतिक सहभागिता, पारिवारिक जुड़ाव और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का सराहनीय प्रयास है। प्रथम दिवस की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने नवरात्रि के स्वागत को विशेष बना दिया और आगामी मंचनों के प्रति दर्शकों में उत्साह एवं उत्सुकता का संचार किया।
