निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष ने मत्स्य विभाग पर उठाए सवाल, सहायक मत्स्य निदेशक पर ठेकेदार से मिलीभगत का आरोप
सोनभद्र। रिहंद जलाशय में बिना अनुमति बड़े पैमाने पर मछली के शिकार और बाजारों में आपूर्ति किए जाने के आरोप ने मत्स्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निषाद पार्टी के जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद ने आरोप लगाया है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद आवश्यक अनुमति के बिना ही ठेकेदार द्वारा प्रतिदिन लाखों रुपये की मछलियों का शिकार कराया जा रहा है।
अनिकेत निषाद के मुताबिक रिहंद जलाशय में 31 अगस्त के बाद मछली शिकार के लिए मत्स्य विभाग की अनुमति आवश्यक है। उनका आरोप है कि 1 सितंबर 2026 से अब तक ऐसी कोई अनुमति उपलब्ध नहीं कराई गई, इसके बावजूद जलाशय से लगातार मछलियां निकाली जा रही हैं और बड़े बाजारों समेत अन्य स्थानों पर आपूर्ति की जा रही है।
उन्होंने सोनभद्र के सहायक मत्स्य निदेशक शुभम कश्यप पर भी ठेकेदार से कथित मिलीभगत कर शिकार को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। जिलाध्यक्ष का कहना है कि इस मामले में पूर्व में मत्स्य विभाग के अपर मुख्य सचिव से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई थी। शिकायत के बाद कुछ समय के लिए शिकार पर रोक लगाए जाने का दावा भी किया गया, लेकिन बाद में नियमों की अनदेखी की शिकायत फिर सामने आने लगीं। मामले की जानकारी मिर्जापुर मंडल के मत्स्य निदेशक को भी दिए जाने की बात कही गई है। अनिकेत निषाद ने आरोप लगाया कि लगातार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब सवाल यह है कि यदि शिकार की अनुमति नहीं है तो रिहंद जलाशय से बड़े पैमाने पर मछलियां किस आधार पर निकाली जा रही हैं? मामले में आरोपों की निष्पक्ष जांच, अनुमति संबंधी अभिलेखों के सत्यापन और शिकार की वास्तविक स्थिति की जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
